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B.S.H.S SCHOOL · UPSC EDITORIAL ANALYSIS

अध्ययन संग्रह — यह पुरानी घटना पर आधारित विश्लेषण है, आज की खबर नहीं।

बीज क्षेत्र के लाभों की साझेदारी

घटना / स्रोत की तारीख: 10 Oct 2026

GS 3: संसाधन जुटाना; प्रमुख फसलें और फसल प्रतिरूप। GS 2: सांविधिक और नियामक संस्थाएं; स्थानीय स्तर तक वित्त का हस्तांतरण; पारदर्शिता और जवाबदेही।[3]

NBA की 10 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति में बीज क्षेत्र से प्राप्त लाभ-साझेदारी राशि के तहत ₹2.02 करोड़ के वितरण की सूचना है। शासन की कसौटी यह है कि संस्थागत हस्तांतरण जवाबदेह संरक्षण और सामुदायिक कल्याण में कितना योगदान देता है।[1]

पहले विषय को समझें

1

साझेदारी की जरूरत

बीज क्षेत्र की कंपनियां फसल किस्मों और संकरों सहित कृषि जैव संसाधनों का उपयोग करती हैं। लाभ-साझेदारी इस उपयोग को संरक्षण, सतत उपयोग और स्थानीय आजीविका के वित्तपोषण से जोड़ती है।[1]

2

ABS का अर्थ

पहुंच और लाभ-साझेदारी यानी ABS का संबंध जैव संसाधनों के उपयोग से मिलने वाले लाभों को साझा करने से है। इस विज्ञप्ति में लाभ बीज क्षेत्र की कंपनियों से प्राप्त और NBA द्वारा वितरित धनराशि के रूप में हैं।[1]

3

संस्था की शुरुआत

जैव विविधता अधिनियम 2002 में बना था। सरकार का ऐतिहासिक 2011 का विवरण बताता है कि राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की स्थापना धारा 8 के तहत 1 अक्टूबर 2003 को चेन्नई में हुई थी।[2]

4

कानूनी स्थिति

ऐतिहासिक विवरण NBA को जैव विविधता अधिनियम, 2002 लागू करने वाला स्वायत्त, सांविधिक और नियामक संगठन बताता है। नई विज्ञप्ति ABS को इस अधिनियम और राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति के क्रियान्वयन से जोड़ती है।[1][2]

5

राशि कैसे बांटी गई

जहां संसाधन बाजारों या व्यापारियों से खरीदे गए और व्यक्तिगत लाभ-दावेदारों की पहचान नहीं हो सकी, वहां NBA ने स्वीकृत वितरण व्यवस्था अपनाई। आधिकारिक कृषि आंकड़ों में दर्ज खेती के क्षेत्रफल के अनुसार राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्रशासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों को हिस्से मिले।[1]

6

तारीख सहित नई खबर

10 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति में 27 राज्य बोर्डों और 3 केंद्रशासित प्रदेश परिषदों को ₹2.02 करोड़ के वितरण की सूचना है। NBA का कुल ABS वितरण ₹202.00 करोड़ हो गया; ये वित्तीय हस्तांतरण हैं, पारिस्थितिक सुधार के माप नहीं।[1]

संदर्भ: यह विषय क्यों महत्वपूर्ण है

मौजूदा आवंटन एक व्यावहारिक समस्या का समाधान करता है: व्यावसायिक उपयोग वाली फसलें बिचौलियों के माध्यम से कंपनियों तक पहुंच सकती हैं, जिससे व्यक्तिगत लाभ-दावेदारों को पहचानना कठिन होता है। इसलिए NBA ने प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत विशेषज्ञ समिति की व्यवस्था और खेती के क्षेत्रफल के आंकड़ों का उपयोग किया।[1] इससे प्रशासन को आवंटन का दर्ज आधार मिलता है। हालांकि, इस आधार को बताई गई परिस्थितियों में राशि बांटने का तरीका समझना चाहिए, यह प्रमाण नहीं कि योगदान देने वाले हर समुदाय को व्यक्तिगत रूप से अनुपातिक लाभ मिलता है।

परिचय

बीज क्षेत्र की ABS व्यवस्था कृषि उत्पादन को जैव विविधता शासन से जोड़ती है। इसके अंतर्गत आने वाले संसाधनों में चावल, बैंगन, फूलगोभी, खीरा और अन्य फसलों की किस्में तथा संकर शामिल हैं।[1] नीतिगत प्रश्न योगदान इकट्ठा करने से आगे जाता है: सार्वजनिक संस्थाएं इस राशि को स्थानीय रूप से उपयोगी संरक्षण में कैसे बदलें? बेहतर दृष्टिकोण में धन, पारिस्थितिक उद्देश्य और सामुदायिक भागीदारी को स्पष्ट क्रियान्वयन क्रम से जोड़ना चाहिए, ताकि वित्तीय अनुपालन और संरक्षण के प्रदर्शन का अलग-अलग आकलन हो सके।

प्रमुख मुद्दे

  • विज्ञप्ति में जैव विविधता प्रबंधन समितियों को मजबूत करने, जन जैव विविधता रजिस्टर अद्यतन करने, पारंपरिक फसल किस्मों के संरक्षण और प्राकृतिक आवासों की बहाली जैसे संभावित उपयोग बताए गए हैं।[1] ये उद्देश्य कई विकल्प देते हैं, लेकिन परियोजनाओं की जिम्मेदारियां अस्पष्ट रहने पर जवाबदेही कमजोर पड़ सकती है। इसलिए प्रत्येक प्राप्तकर्ता संस्था को गतिविधि, अपेक्षित लाभार्थी, क्रियान्वयन व्यवस्था और प्रगति जांचने के प्रमाण स्पष्ट करने चाहिए। रजिस्टर या बैठक पर खर्च को अपने आप सफल संरक्षण नहीं बताना चाहिए।

महत्व

  • क्रियान्वयन की कड़ी NBA के वितरण को राज्य बोर्डों और केंद्रशासित प्रदेश परिषदों से तथा फिर स्थानीय संरक्षण कार्य से जोड़ती है। विज्ञप्ति समर्थित गतिविधियों में जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ मजबूत करना और जन जैव विविधता रजिस्टर अद्यतन करना बताती है। [1] ये रजिस्टर स्थानीय जैव संसाधनों का ज्ञान व्यवस्थित कर सकते हैं; इनका निर्माण केवल दफ्तरी काम के बजाय समुदाय की भागीदारी से हो। स्थानीय संस्थाएँ दर्ज संसाधनों और परंपरागत किस्मों को व्यावहारिक संरक्षण प्राथमिकताओं तथा पारदर्शी खर्च से जोड़ें। इससे लाभ-साझेदारी का उपयोग तय करने में समुदाय की भूमिका स्पष्ट होगी।

चुनौतियाँ और संतुलित विश्लेषण

  • खेती का क्षेत्रफल प्रशासन के लिए उपयोगी आधार देता है, लेकिन स्थानीय संरक्षण प्राथमिकताओं के लिए परियोजना स्तर पर अतिरिक्त आकलन जरूरी हो सकता है। जहां व्यक्तिगत दावेदारों की पहचान नहीं हुई है, वहां संस्थाओं को आगे मिलने वाले सामुदायिक लाभ का रास्ता स्पष्ट करना चाहिए। विज्ञप्ति जनजातीय कल्याण और आजीविका कार्यक्रमों के साथ पूरक संबंध भी सुझाती है।[1] ऐसा समन्वय उपयोगी हो सकता है, यदि अलग-अलग वित्तीय स्रोत, जिम्मेदारियां और परिणाम स्पष्ट दर्ज हों। अन्यथा एक ही गतिविधि का श्रेय कई कार्यक्रमों को दिया जा सकता है, जबकि ABS के अतिरिक्त योगदान का प्रमाण न मिले।

आगे की राह

  • प्राप्तकर्ता बोर्ड और परिषदें आवंटन का आधार, परियोजना योजनाएं और समय-समय पर खर्च के विवरण प्रकाशित करने पर विचार करें। सामुदायिक परामर्श से यह तय करने में मदद मिल सकती है कि स्थानीय स्तर पर फसल किस्मों का संरक्षण, प्राकृतिक आवास की बहाली या संस्थागत मजबूती अधिक उपयोगी है। निगरानी में हस्तांतरित राशि, पूरी गतिविधियां और देखे गए पारिस्थितिक या आजीविका बदलाव अलग होने चाहिए। कार्यक्रमों के समन्वय में ABS का विशिष्ट योगदान दर्ज हो। इससे वितरण को सफलता मान लेने के बजाय विज्ञप्ति के संरक्षण और कल्याण उद्देश्यों की जांच संभव होगी।[1]

निष्कर्ष

विज्ञप्ति पूरी हो चुकी वित्तीय वितरण प्रक्रिया और राशि के उपयोग की अपेक्षित दिशाओं का विवरण देती है।[1] इसकी व्यापक संभावना राशि मिलने के बाद जवाबदेह क्रियान्वयन पर निर्भर है। संतुलित आकलन में संसाधन जुटाने को स्वीकार करना चाहिए, लेकिन जैव विविधता या आजीविका सुधार के दावे प्रमाणित परिणामों पर आधारित होने चाहिए। यदि प्राप्तकर्ता संस्थाएं दिखा सकें कि धन पारदर्शी और स्थानीय जरूरतों पर आधारित निर्णयों से समुदायों तथा जैव संसाधनों को कैसे सहारा देता है, तो न्यायसंगत साझेदारी अधिक सार्थक होगी।

प्रारंभिक परीक्षा हेतु तथ्य

  • संस्थागत अंतर: NBA ने योगदान राशि वितरित की; राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्रशासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों को बताए गए हिस्से मिले। व्यक्तिगत दावेदारों की पहचान न होने पर खेती का क्षेत्रफल आवंटन का घोषित आधार था।[1]
  • अंतरराष्ट्रीय संबंध: लक्ष्य 13 आनुवंशिक संसाधनों और उनसे जुड़े परंपरागत ज्ञान के उपयोग से लाभों का न्यायपूर्ण तथा समान साझाकरण है; लक्ष्य 19 संसाधन जुटाने से संबंधित है। विज्ञप्ति राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति 2024–2030 का उल्लेख करती है। [1]

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

व्यक्तिगत लाभ-दावेदारों की पहचान न होने पर बीज क्षेत्र की पहुंच और लाभ-साझेदारी जवाबदेह संरक्षण का वित्तपोषण कैसे कर सकती है? आवंटन दृष्टिकोण और क्रियान्वयन के आवश्यक उपायों की चर्चा कीजिए। (10 अंक; सुझाई गई शब्द सीमा: 150 शब्द)

आदर्श उत्तर

बीज क्षेत्र की पहुंच और लाभ-साझेदारी कृषि जैव संसाधनों के उपयोग को संरक्षण और सामुदायिक कल्याण से जोड़ती है। NBA ने राज्य बोर्डों और केंद्रशासित प्रदेश परिषदों को ₹2.02 करोड़ बांटने की सूचना दी।[1] बाजारों या व्यापारियों से खरीद के कारण व्यक्तिगत दावेदारों की पहचान न होने पर आधिकारिक कृषि आंकड़ों में खेती के क्षेत्रफल पर आधारित स्वीकृत व्यवस्था अपनाई गई।[1]

यह आवंटन का दर्ज आधार देता है, लेकिन हस्तांतरण मात्र न्यायसंगत स्थानीय परिणाम सिद्ध नहीं करता। प्राप्तकर्ता संस्थाओं को आवंटन का आधार प्रकाशित करना, समुदायों से परामर्श करना और स्पष्ट संरक्षण उद्देश्यों वाली परियोजनाएं चुननी चाहिए। प्रासंगिक गतिविधियों में जैव विविधता प्रबंधन समितियों की मजबूती, जैव विविधता रजिस्टरों का अद्यतन और पारंपरिक फसल किस्मों का संरक्षण शामिल हैं।[1]

निगरानी में प्राप्त राशि, खर्च, पूरी गतिविधियां और प्रमाणित पारिस्थितिक या आजीविका बदलाव अलग दर्ज हों। कल्याण कार्यक्रमों से समन्वय में जिम्मेदारियां स्पष्ट हों और दोहरा श्रेय न दिया जाए। सार्वजनिक रिपोर्ट और सामुदायिक प्रतिक्रिया साझेदारी को जवाबदेह बना सकती हैं। इसलिए व्यवस्था की संभावना संसाधन जुटाने को पारदर्शी स्थानीय क्रियान्वयन से जोड़ने में है, वितरण को संरक्षण सफलता मान लेने में नहीं।

महत्वपूर्ण शब्द

  • पहुंच और लाभ-साझेदारी: जैव संसाधनों के उपयोग से मिलने वाले लाभों को साझा करना; बताए गए बीज क्षेत्र के योगदान धनराशि के रूप में हैं।[1]
  • आवंटन का प्रतिनिधि आधार: वितरण के लिए उपयोग किया जाने वाला मापनीय आधार; बताई गई परिस्थितियों में खेती के क्षेत्रफल ने यह भूमिका निभाई।[1]
  • संसाधन जुटाना: संरक्षण और संबंधित उद्देश्यों के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध करना; इससे अपने आप प्रभावी उपयोग सिद्ध नहीं होता।[1]

स्रोत एवं तथ्य-जाँच

  1. NBA disburses seed-sector Access and Benefit-Sharing contributions, 10 October 2026
  2. Preservation of Biodiversity of the Country, 15 March 2011
  3. UPSC Civil Services Examination 2026: official syllabus

UPSC Prelims अभ्यास प्रश्न

इस संपादकीय पर आधारित मौलिक अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

बीज क्षेत्र की बताई गई ABS राशि के वितरण के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बाजार या व्यापारी से खरीद के बाद व्यक्तिगत लाभ-दावेदारों की पहचान न होने पर खेती के क्षेत्रफल का उपयोग किया गया। 2. बताए गए लाभार्थी हिस्से राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्रशासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों को दिए गए। 3. व्यक्तिगत दावेदार पहचाने न जाने पर रिपोर्ट किए हिस्से प्राप्तकर्ता राज्य बोर्डों और केंद्रशासित प्रदेश परिषदों में बराबर बाँटे गए। कौन-से कथन सही हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3
उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A)

कथन 1 और 2 सही हैं: विज्ञप्ति खेती-क्षेत्रफल पर वितरण तथा बोर्डों और परिषदों को प्राप्तकर्ता बताती है। कथन 3 गलत है: हिस्से आधिकारिक कृषि आँकड़ों में खेती-क्षेत्रफल पर आधारित थे, संस्थाओं के बराबर हिस्सों पर नहीं। इसलिए A, केवल कथन 1 और 2 सही हैं। [1]

प्रश्न 2

इन युग्मों पर विचार कीजिए: 1. वैश्विक जैव विविधता ढांचे का लक्ष्य 13 — उचित और न्यायसंगत लाभ-साझेदारी 2. वैश्विक जैव विविधता ढांचे का लक्ष्य 19 — संसाधन जुटाना 3. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण — जैव विविधता अधिनियम के बजाय राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति के तहत स्थापित निकाय कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 3
  3. केवल 1 और 2
  4. केवल 2 और 3
उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C)

युग्म 1 लक्ष्य 13 और युग्म 2 लक्ष्य 19 को सही पहचानते हैं।[1] युग्म 3 गलत है: ऐतिहासिक विवरण NBA को जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 8 के तहत स्थापित बताता है; रणनीति एक अलग नीतिगत संबंध है।[1][2]

प्रश्न 3

बीज क्षेत्र के ABS योगदान में बाजार या व्यापारियों से खरीद के बाद व्यक्तिगत लाभ-दावेदार पहचाने न जा सकें, तो रिपोर्ट किए NBA वितरण का आधार क्या था?

  1. योगदान करने वाली कंपनियों के पंजीकृत कार्यालय का स्थान
  2. आधिकारिक कृषि आँकड़ों में दर्ज खेती का क्षेत्रफल
  3. प्राप्तकर्ता संस्थाओं द्वारा पूर्ण किए जैव विविधता रजिस्टरों की संख्या
  4. खेती के क्षेत्रफल से स्वतंत्र प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश का समान हिस्सा
उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B)

B सही है: इन निर्दिष्ट परिस्थितियों में स्वीकृत वितरण पद्धति ने आधिकारिक कृषि आँकड़ों का खेती-क्षेत्रफल इस्तेमाल किया। कंपनी कार्यालय, रजिस्टर पूर्ण करना और प्रत्येक क्षेत्र को बराबर हिस्सा बताए आधार नहीं थे। संस्थागत वितरण से व्यक्तियों को सीधे भुगतान सिद्ध नहीं होता। [1]