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B.S.H.S SCHOOL · UPSC EDITORIAL ANALYSIS

अध्ययन संग्रह — यह पुरानी घटना पर आधारित विश्लेषण है, आज की खबर नहीं।

परीक्षा सुधार: निष्पक्षता और जवाबदेही से भरोसा कैसे बने

घटना / स्रोत की तारीख: 09 Oct 2026

GS 2 — शिक्षा संबंधी सामाजिक क्षेत्र और सेवाओं का विकास एवं प्रबंधन; पारदर्शिता और जवाबदेही; संसदीय समितियाँ। अतिरिक्त: GS 4 — सत्यनिष्ठा और जवाबदेही।

नई संसदीय रिपोर्ट परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा का अवसर देती है। प्रश्नपत्र की सुरक्षा के साथ विद्यार्थियों की पहुँच, स्पष्ट सूचना और शिकायत का उचित समाधान भी जरूरी है।

पहले विषय को समझें

1

अलग परीक्षा संस्था की ज़रूरत

2017 की मंत्रिमंडल घोषणा में अलग विशेषज्ञ संस्था की जरूरत बताई गई थी। इसका उद्देश्य CBSE, AICTE जैसी संस्थाओं का प्रवेश परीक्षा संबंधी काम कम करना तथा मूल्यांकन की विश्वसनीयता और समान स्तर बेहतर करना था।

यह नया विश्वविद्यालय बनाने की योजना नहीं थी। [3]

2

इस ज़रूरत से जुड़ी संस्था: NTA

National Testing Agency एक विशेषज्ञ परीक्षा संस्था है। यह शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग से संबंधित है।

इसका मूल उद्देश्य उच्च शिक्षा में प्रवेश और fellowship के लिए परीक्षण व्यवस्था है; fellowship का अर्थ अध्ययन या शोध के लिए चयन से संबंधित सहायता का अवसर है। [3][4]

3

स्थापना के दो पड़ाव

मंत्रिमंडल ने 10 नवंबर 2017 को मंजूरी दी। NTA के RTI दस्तावेज के अनुसार society के रूप में पंजीकरण 15 मई 2018 को हुआ।

मंजूरी और पंजीकरण दो अलग पड़ाव हैं। [3][4]

4

अब इसका कानूनी स्वरूप समझें

NTA का दर्ज स्वरूप Societies Registration Act, 1860 के तहत पंजीकृत स्वायत्त society है। इसकी स्थापना सरकारी कार्यपालिका के निर्णय से हुई; सीधे संविधान या NTA बनाने वाले अलग विशेष कानून से नहीं।

संवैधानिक संस्था सीधे संविधान से और वैधानिक प्राधिकरण उसे बनाने वाले विशेष कानून से स्थापित होता है। सामान्य कानून के तहत पंजीकरण को विशेष कानून द्वारा संस्था की रचना न समझें।

यह अंतर दर्ज स्थापना व्यवस्था से निकाला गया है। [3][4]

5

स्थापना के बाद इसकी भूमिका

RTI दस्तावेज में परीक्षा संचालन, मूल्यांकन संबंधी शोध, प्रश्न बनाने वाले विशेषज्ञों की पहचान, प्रश्न बैंक और संस्थाओं को परीक्षण संबंधी सहायता जैसे कार्य दिए हैं। भूमिका केवल प्रश्नपत्र बाँटना नहीं है। [4] CBT में कंप्यूटर के माध्यम से परीक्षा दी जाती है।

प्रश्न बैंक प्रश्नों का व्यवस्थित संग्रह है, जिससे प्रश्नपत्र तैयार हो सकते हैं। परीक्षा संचालन, संस्था की समीक्षा और कक्षा का मूल्यांकन अलग काम हैं। [1][2]

6

2024 में परीक्षा पर भरोसे का सवाल

NEET-UG 2024 में प्रश्नपत्र लीक का विवाद सर्वोच्च न्यायालय पहुँचा। 23 जुलाई 2024 के निर्णय में पटना और हजारीबाग में लीक होने का तथ्य स्वीकार किया गया।

लेकिन पूरे परिणाम को प्रभावित करने वाली व्यापक गड़बड़ी के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिलने पर अदालत ने पूरी परीक्षा रद्द करके दोबारा कराने का आदेश नहीं दिया। [5]

7

कौन-सी परीक्षा वास्तव में रद्द हुई

UGC-NET जून 2024 की परीक्षा 18 जून को हुई थी। परीक्षा की शुचिता प्रभावित होने के प्रारंभिक संकेत मिलने पर शिक्षा मंत्रालय ने 19 जून को इसे रद्द करने और मामले की CBI जाँच कराने की घोषणा की।

इसे पूरे NEET-UG की परीक्षा रद्द होने से न मिलाएँ; दोनों अलग घटनाएँ हैं। [6]

8

इसके बाद सुधार की कार्रवाई

22 जून 2024 को शिक्षा मंत्रालय ने के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति बनाई। उसे परीक्षा प्रक्रिया, डेटा सुरक्षा और NTA के ढाँचे की समीक्षा करनी थी।

यह 2024 की समिति है; आगे दी गई 2026 की संसदीय रिपोर्ट अलग समीक्षा है। इनके बीच सुधारों के लागू होने का दावा अलग प्रमाण के बिना नहीं किया जा सकता। [7][1]

9

आज किन परीक्षाओं से संबंध है

अक्टूबर 2026 की संसदीय रिपोर्ट NTA के संदर्भ में JEE-Mains, NEET-UG, UGC-NET और CUET की चर्चा करती है। इसे 2017 की मूल घोषणा से अलग पढ़ें; पुरानी योजना को आज का परीक्षा कार्यक्रम न मानें। [1][3]

10

यहाँ से आज की खबर तक

9 अक्टूबर 2026 को संसदीय स्थायी समिति ने NTA सुधार पर अपनी 382वीं रिपोर्ट प्रस्तुत की। यह पहले से मौजूद संस्था की समीक्षा है, NTA की पहली बार स्थापना की घोषणा नहीं। [1]

11

रिपोर्ट में आगे के सुधार

रिपोर्ट में प्रश्न बैंक, विशेषज्ञ कर्मचारियों, सुरक्षित डिजिटल परीक्षा और पहुँच संबंधी सुरक्षा उपायों की सिफारिशें हैं। सिफारिश को अपने आप लागू नियम न समझें। [1]

संदर्भ: यह विषय क्यों महत्वपूर्ण है

9 अक्टूबर 2026 को संसदीय स्थायी समिति ने National Testing Agency को मजबूत करने की अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। यह समिति की रिपोर्ट है; इसकी सिफारिशों को लागू कानून या पूरा हो चुका सुधार नहीं मानना चाहिए। [1]

परिचय

प्रतियोगी परीक्षा सीमित शैक्षिक अवसरों का वितरण करती है। उसकी विश्वसनीयता इस भरोसे पर निर्भर है कि सबकी उपलब्धि समान नियमों से जाँची जाएगी और प्रशासनिक गलती का समाधान संभव होगा। इसलिए परीक्षा व्यवस्था के 2 उद्देश्य हैं—सीखने की योग्यता मापना और समान अवसर में विश्वास बनाए रखना। केवल परीक्षा करा देना निष्पक्ष व्यवस्था का पर्याप्त प्रमाण नहीं है।

प्रमुख मुद्दे

  • सुरक्षा जिम्मेदारियों की पूरी शृंखला है। प्रश्न तैयार करने, सामग्री तक पहुँच, परीक्षा केंद्र तक पहुँचाने, निगरानी और परिणाम बनाने के हर चरण का जिम्मेदार तय होना चाहिए। कमजोर चरण को केवल नया तकनीकी उपकरण जोड़कर ठीक नहीं किया जा सकता।
  • निष्पक्षता में भाषा, दूरी, दिव्यांग विद्यार्थियों की पहुँच और समझ आने वाले निर्देश भी शामिल हैं। संसाधन अलग होने पर समान नियमों का बोझ अलग हो सकता है। पहले की विशेषज्ञ रिपोर्ट प्रवेश परीक्षा को व्यापक शिक्षा सुधार के विचार से जोड़ती है। [2]
  • गलती के समाधान में व्यक्तिगत शिकायत और पूरे केंद्र या परीक्षा को प्रभावित करने वाली समस्या अलग पहचाननी चाहिए। यह विश्लेषण का सुझाव है; वास्तविक निर्णय प्रमाण और लागू नियम देखकर लिया जाना चाहिए।

महत्व

  • विश्वसनीय परीक्षा सामाजिक उन्नति में सहायता करती है, क्योंकि विद्यार्थी निजी प्रभाव के बिना प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। तय और भरोसेमंद प्रक्रिया परिवारों, विश्वविद्यालयों तथा प्रवेश कार्यक्रम की अनावश्यक अनिश्चितता कम करती है।
  • भरोसे का नैतिक पक्ष भी है। विद्यार्थी को उससे जुड़े निर्णय का कारण मिलना चाहिए। साथ ही निजी जानकारी और गोपनीय परीक्षा सामग्री सुरक्षित रहनी चाहिए। उचित गोपनीयता और पारदर्शिता एक साथ संभव हैं।

चुनौतियाँ और संतुलित विश्लेषण

  • बड़ी परीक्षाओं में कई संस्थाएँ और सेवा प्रदाता काम करते हैं। बाहरी संस्था से कार्य कराने पर जिम्मेदारी धुँधली हो सकती है। इसलिए समझौते में रिकॉर्ड, सेवा का स्तर और समस्या बढ़ने पर संपर्क की प्रक्रिया तय होनी चाहिए।
  • सुरक्षा और पहुँच में कभी तनाव हो सकता है। मजबूत पहचान जाँच के साथ तकनीकी खराबी की वैकल्पिक प्रक्रिया जरूरी है। गलत तरीका किसी पात्र विद्यार्थी को भी परीक्षा से बाहर कर सकता है।

आगे की राह

  • पहले, हर चरण की जिम्मेदारी प्रकाशित हो और परीक्षा से पहले स्वतंत्र संचालन जाँच हो। दूसरे, आपात व्यवस्था का वास्तविक परिस्थितियों जैसा अभ्यास हो; लिखी प्रक्रिया को अपने आप सफल न मानें।
  • तीसरे, विद्यार्थी सहायता कई भाषाओं में और सबके लिए सुलभ हो। शिकायत की प्राप्ति, समय सीमा और निर्णय का कारण स्पष्ट मिले। चौथे, पहचान उजागर किए बिना भागीदारी और परिणामों का अध्ययन करके बाधाएँ पहचानें। पाँचवें, परीक्षा के बाद समस्या, सुधार और कार्य पूरा होने की तारीख वाली समीक्षा प्रकाशित हो। ये मूल्यांकन के सुझाव हैं; सभी उपाय पहले से लागू होने का दावा नहीं है।

निष्कर्ष

भरोसा बार-बार निष्पक्ष प्रशासन का प्रमाण मिलने से बनता है। परीक्षा सुधार में प्रशिक्षित व्यवस्था, उचित सुरक्षा, समान पहुँच और प्रभावी समाधान जुड़े हों। उद्देश्य ऐसी भरोसेमंद संस्था बनाना है जिसे विद्यार्थी समझ सकें और जिससे जवाब माँग सकें।

प्रारंभिक परीक्षा हेतु तथ्य

  • स्थापना के पड़ाव: मंत्रिमंडल की मंजूरी — 10 नवंबर 2017; society पंजीकरण — 15 मई 2018। दोनों को बदलकर न रखें। [3][4]
  • कानूनी स्वरूप: Societies Registration Act, 1860 के तहत पंजीकृत स्वायत्त society। सरकारी कार्यपालिका द्वारा स्थापना, सीधे संविधान या NTA बनाने वाले विशेष कानून द्वारा रचना से अलग है। [3][4]
  • प्रशासनिक संबंध: शिक्षा मंत्रालय का उच्च शिक्षा विभाग। स्वायत्तता का अर्थ मंत्रालय से कोई संबंध न होना नहीं है। [4]
  • काम: प्रवेश/fellowship परीक्षण और मूल्यांकन विशेषज्ञता। RTI दस्तावेज में शोध, प्रश्न बैंक और संस्थाओं को परीक्षण सहायता भी दी है। [4]
  • वर्तमान रिपोर्ट: 382वीं संसदीय रिपोर्ट पहले से मौजूद NTA के सुधार पर है। कर्मचारियों, CBT और प्रश्न बैंक से जुड़े प्रस्ताव सिफारिशें हैं, अपने आप लागू कानूनी प्रावधान नहीं। [1]

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

मौलिक अभ्यास प्रश्न: “परीक्षा की सत्यनिष्ठा के लिए सुरक्षित तकनीक के साथ संस्थागत जवाबदेही आवश्यक है।” उच्च शिक्षा की प्रवेश परीक्षाओं के संदर्भ में चर्चा कीजिए। 10 अंक; आदर्श उत्तर-लंबाई: 150 शब्द।

आदर्श उत्तर

प्रवेश परीक्षा सीमित शैक्षिक अवसर बाँटती है। इसलिए उसकी सत्यनिष्ठा योग्यता और सार्वजनिक भरोसे दोनों को प्रभावित करती है। NTA पर नई संसदीय रिपोर्ट इस जिम्मेदारी की व्यवस्था पर विचार का संदर्भ देती है। [1]

सुरक्षित तकनीक सामग्री तक पहुँच नियंत्रित कर सकती है और अनियमितता पहचान सकती है। लेकिन वह प्रशिक्षित कर्मचारी, स्पष्ट जिम्मेदारी तथा निष्पक्ष शिकायत समाधान का विकल्प नहीं है। बाहरी सेवा प्रदाता का उपयोग होने पर भी परीक्षा प्राधिकरण को रिकॉर्ड और सेवा मानकों से निगरानी बनाए रखनी चाहिए। विद्यार्थियों को सुलभ निर्देश और भरोसेमंद सहायता भी चाहिए।

सुधार में स्वतंत्र तैयारी जाँच, आपात व्यवस्था का अभ्यास तथा प्रश्नों की सुरक्षित देखरेख जुड़ी हों। कई भाषाओं में सहायता मिले। शिकायत की प्राप्ति, जाँच की समय सीमा और निर्णय का कारण स्पष्ट हो। परीक्षा बाद समीक्षा में निजी जानकारी बचाते हुए व्यवस्था की कमियाँ और सुधार बताए जाएँ।

इस प्रकार परीक्षा की सत्यनिष्ठा निरंतर प्रशासनिक दायित्व है। उसका मूल्यांकन सुरक्षा के साथ समान पहुँच, विश्वसनीय संचालन और प्रभावी समाधान से होना चाहिए।

महत्वपूर्ण शब्द

  • Accountability — जवाबदेही: निर्णय का कारण बताने और जिम्मेदारी लेने का दायित्व।
  • Equity — परिस्थितियों और पहुँच के अंतर को ध्यान में रखने वाली निष्पक्षता।
  • Audit trail — कार्रवाई किसने और कब की, यह बताने वाला रिकॉर्ड।

स्रोत एवं तथ्य-जाँच

  1. PIB, 9 October 2026: Parliamentary committee report on NTA reform
  2. Ministry of Education: High-Level Committee of Experts report, background
  3. PIB: Cabinet approval of NTA, 10 November 2017
  4. NTA RTI manual: organisation, registration and functions
  5. Supreme Court, 23 July 2024: NEET-UG judgment, 2024 INSC 553
  6. PIB, 19 June 2024: UGC-NET cancellation and investigation
  7. PIB, 22 June 2024: Expert committee on NTA examination reforms

UPSC Prelims अभ्यास प्रश्न

इस संपादकीय पर आधारित मौलिक अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

NTA के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उसकी रचना सीधे भारत के संविधान के प्रावधान से हुई। 2. Societies Registration Act, 1860 के तहत पंजीकरण स्वयं उसे NTA बनाने वाले विशेष कानून से रचित प्राधिकरण बना देता है। 3. उसका दर्ज संस्थागत स्वरूप पंजीकृत स्वायत्त society है। उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. तीनों
  4. कोई भी नहीं
उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A)

केवल 3 सही है। NTA की मंजूरी कार्यपालिका के निर्णय से हुई और society के रूप में पंजीकरण हुआ। सामान्य पंजीकरण कानून NTA बनाने वाला विशेष कानून नहीं है; पंजीकरण को संवैधानिक या वैधानिक रचना न समझें। [3][4]

प्रश्न 2

NTA से संबंधित निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. मंत्रिमंडल की मंजूरी — 10 नवंबर 2017 2. society पंजीकरण — 15 मई 2018 3. प्रशासनिक संबंध — उच्च शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. तीनों
  4. कोई भी नहीं
उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C)

तीनों सही हैं। मंजूरी और पंजीकरण अलग पड़ाव हैं; RTI दस्तावेज मंत्रालय और विभाग का संबंध भी बताता है। स्वायत्त होने से यह संबंध समाप्त नहीं हो जाता। [3][4]

प्रश्न 3

अक्टूबर 2026 की NTA रिपोर्ट के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह रिपोर्ट ही पहली बार NTA की रचना करती है। 2. रिपोर्ट प्रस्तुत होने मात्र से प्रश्न बैंक मजबूत करने का प्रस्ताव अपने आप लागू कानून है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1, न ही 2
उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (D)

दोनों गलत हैं। रिपोर्ट मौजूद संस्था की समीक्षा और सुधार की सिफारिश करती है। स्थापना उससे पहले की है; सिफारिश प्रस्तुत होना स्वयं कानून बनना नहीं है। [1][3][4]

प्रश्न 4

निम्नलिखित में से कौन-सा NTA का प्रशासनिक संबंध सही बताता है?

  1. स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय
  2. उच्च शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय
  3. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
  4. कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय
उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B)

NTA का RTI दस्तावेज उच्च शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय बताता है। मेडिकल प्रवेश की परीक्षा लेने से वह स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत नहीं आ जाती; शिक्षा से संबंध का अर्थ स्कूल शिक्षा विभाग नहीं है। कार्मिक विभाग भी उसका दर्ज प्रशासनिक संबंध नहीं है। [4]

प्रश्न 5

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन-I: Societies Registration Act, 1860 के तहत NTA का पंजीकरण अकेले प्रमाण नहीं है कि NTA बनाने वाले विशेष कानून ने उसकी रचना की। कथन-II: सामान्य society-पंजीकरण कानून के तहत पंजीकरण और विशेष कानून से प्राधिकरण की रचना अलग कानूनी व्यवस्थाएँ हैं। निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?

  1. कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है
  2. कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं, लेकिन कथन-II, कथन-I की व्याख्या नहीं करता
  3. कथन-I सही है, लेकिन कथन-II गलत है
  4. कथन-I गलत है, लेकिन कथन-II सही है
उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A)

दोनों सही हैं और कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है। स्थापना का रिकॉर्ड मंत्रिमंडल की मंजूरी और society पंजीकरण बताता है। दोनों व्यवस्थाएँ अलग हैं; सामान्य पंजीकरण कानून NTA बनाने वाला विशेष कानून नहीं है। [3][4]