अध्ययन संग्रह — यह पुरानी घटना पर आधारित विश्लेषण है, आज की खबर नहीं।
JJM समीक्षा: नल कनेक्शन से आगे भरोसेमंद पेयजल सेवा पर जोर
घटना / स्रोत की तारीख: 07 Oct 2026
GS 2: विकास के लिए सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप; स्वास्थ्य संबंधी सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन के विषय। GS 3: संरक्षण; अवसंरचना।
बेंगलुरु समीक्षा ने स्रोत स्थिरता, रखरखाव, स्वतंत्र निगरानी और सामुदायिक जवाबदेही पर बल दिया। DDWS ने कनेक्शन विस्तार बताया, लेकिन चर्चा का केंद्र बुनियादी ढाँचे से नियमित और निर्धारित गुणवत्ता का जल सुनिश्चित करना था। सौरकरण अभी विचाराधीन था। [1][2]
पहले विषय को समझें
सेवा की आवश्यकता
घरेलू नल तभी उपयोगी है जब पर्याप्त मात्रा और निर्धारित गुणवत्ता का जल नियमित मिले। इसलिए जल जीवन मिशन भौतिक कनेक्शन के साथ दीर्घकालीन पेयजल सेवा से भी संबंधित है। [2]
अर्थ और क्रियान्वयन संस्था
JJM का अर्थ जल जीवन मिशन और DDWS का अर्थ पेयजल एवं स्वच्छता विभाग है। JJM 2.0 की क्षेत्रीय समीक्षा में विभाग ने बुनियादी ढाँचा बनाने से टिकाऊ तथा जवाबदेह सेवा की ओर बदलाव पर चर्चा की। [1]
गुणवत्ता और स्रोत स्थिरता
समीक्षा ने स्वतंत्र जल-गुणवत्ता निगरानी और उसके निष्कर्ष समुदाय को उपलब्ध कराने का आग्रह किया। स्रोत स्थिरता बताती है कि जल स्रोत निरंतर सेवा दे सकता है या नहीं; समीक्षा में निर्णय-सहायता प्रणाली क्रियान्वयन प्राथमिकता थी। [1]
वर्तमान विकास और अभिप्राय
सचिव ने समीक्षा के विवरण में शुरुआत के 3.27 करोड़ के मुकाबले 15.96 करोड़ से अधिक ग्रामीण घरेलू कनेक्शन बताए। आकलन में रिसाव और टूट-फूट, फिर बिजली समस्याएँ व्यवधान के कारण बताए गए; नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) से चर्चा पेयजल परिसंपत्तियों के सौरकरण की जाँच कर रही थी, पूरे देश में पूरा क्रियान्वयन नहीं बता रही थी। [1]
संदर्भ: यह विषय क्यों महत्वपूर्ण है
JJM अगस्त 2019 में शुरू हुआ। जुलाई की व्याख्या बताती है कि मार्च 2026 में मंत्रिमंडल ने बढ़े वित्त और JJM 2.0 के अंतर्गत पुनर्गठित क्रियान्वयन के साथ इसे दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की स्वीकृति दी। प्रत्येक राज्य/केंद्रशासित प्रदेश को व्यापक क्रियान्वयन और सुधार योजना (CIRP) तैयार करनी है। यह योजना, प्राथमिकता निर्धारण, योजनाओं तथा सुधारों के क्रियान्वयन, धन आवंटन और निगरानी का प्रमुख ढाँचा होगी। यह पृष्ठभूमि अक्टूबर समीक्षा का सेवा-केंद्रित दृष्टिकोण समझाती है: बढ़े कनेक्शन को कार्यशील परिसंपत्तियों, विश्वसनीय स्रोतों और दीर्घकालीन निर्धारित-गुणवत्ता वाले जल से टिकाऊ बनाना होगा। [1][2]
परिचय
DDWS की 7 अक्टूबर की बेंगलुरु समीक्षा ने JJM 2.0 में जल गुणवत्ता, डिजिटल शासन, सामुदायिक भागीदारी और स्रोत स्थिरता पर चर्चा की। सचिव के कवरेज आँकड़े मंत्रालय द्वारा बताए गए आँकड़े थे, जबकि चर्चा टिकाऊ और जवाबदेह सेवा पर केंद्रित थी। आकलन ने रिसाव और टूट-फूट, फिर बिजली समस्याएँ बताईं। इससे सेवा-केंद्रित बदलाव का व्यावहारिक आधार मिलता है: परिसंपत्तियाँ चालू रहनी चाहिए और समुदाय के पास जानकारी तथा संस्थागत मंच होने चाहिए, जिनसे उनकी कार्यशीलता जाँची जा सके। [1]
प्रमुख मुद्दे
- तकनीकी और संस्थागत कार्य एक-दूसरे पर निर्भर हैं। पाइप की मरम्मत वितरण विफलता संबोधित करती है, लेकिन नियमित सेवा के लिए टिकाऊ स्रोत और परिसंपत्ति सँभालने वाली संचालन व्यवस्था भी चाहिए। जल अर्पण का औपचारिक हस्तांतरण तथा सामुदायिक परीक्षण आरंभिक चालू स्थिति को स्थानीय संचालन से जोड़ता है। फिर भी हस्तांतरण स्वयं रखरखाव वित्त नहीं देता या हर संचालन कार्य नहीं समझाता। इसलिए पूर्व मार्गदर्शन में संचालन-रखरखाव नीतियाँ, उपयोगकर्ता शुल्क और पर्याप्त वित्त हैं; राज्यों के योजना, क्रियान्वयन तथा रखरखाव दायित्व बने रहते हैं। [1][2]
महत्व
- स्वतंत्र जल-गुणवत्ता निगरानी और समुदाय को उसके निष्कर्ष मिलने से गुणवत्ता आकलन अधिक स्पष्ट हो सकता है। ग्राम सभाएँ जल गुणवत्ता निष्कर्षों की समीक्षा करके सुधारात्मक उपाय पहचान सकती हैं; VWSC और ग्राम पंचायत हस्तांतरण तथा संचालन से सीधे जुड़े हैं। स्थानीय पुस्तिकाएँ संचालन दायित्वों को उपयोग योग्य मार्गदर्शन में बदलती हैं। स्रोत स्थिरता की निर्णय-सहायता प्रणाली क्रियान्वयन विकल्पों में सहायक हो सकती है, लेकिन प्राथमिकता के रूप में पहचान सार्वभौमिक उपयोग का प्रमाण नहीं है। ये व्यवस्थाएँ परिसंपत्ति चालू होने के बाद अपेक्षित सेवा बनाए रखने में सहायता करती हैं। [1][2]
चुनौतियाँ और संतुलित विश्लेषण
- आकलन निष्कर्ष बताते हैं कि रखरखाव एक ही हस्तक्षेप तक सीमित नहीं किया जा सकता। रिसाव, टूट-फूट और बिजली समस्याएँ सेवा शृंखला के अलग हिस्सों को प्रभावित करती हैं और अलग प्रतिक्रिया माँगती हैं। सामुदायिक संस्थाओं को समझने योग्य गुणवत्ता जानकारी तथा व्यवहार्य संचालन व्यवस्था चाहिए। वित्त केवल प्रारंभिक निर्माण के बजाय निरंतर रखरखाव को भी सहारा दे। सौरकरण चर्चा बिजली की समस्या संबोधित कर सकती है, लेकिन विज्ञप्ति पूरी राष्ट्रीय योजना, अंतिम स्वरूप या सभी व्यवधान दूर होने की सीमा स्थापित नहीं करती। [1][2]
आगे की राह
- क्रियान्वयन में बताए व्यवधानों को व्यावहारिक रखरखाव योजना और पर्याप्त संचालन वित्त से जोड़ना चाहिए। हस्तांतरण निर्धारित सामुदायिक परीक्षण के बाद हो तथा उपयोग योग्य स्थानीय पुस्तिकाएँ साथ मिलें। स्वतंत्र जल-गुणवत्ता निगरानी के निष्कर्ष ग्राम सभा समीक्षा और सुधारात्मक उपाय पहचानने के लिए उपलब्ध हों। स्रोत स्थिरता उपकरण प्रासंगिक विकल्पों में सहायता करें। सौरकरण उपाय को स्पष्ट स्थिति वाला विशिष्ट बिजली हस्तक्षेप समझना चाहिए; वह स्रोत प्रबंधन या पाइप रखरखाव का विकल्प नहीं है। इन कार्यों का समन्वय आवश्यक होगा। [1][2]
निष्कर्ष
समीक्षा बढ़ते कनेक्शन के बाद सेवा बनाए रखने को अगला कार्य बताती है। स्थानीय हस्तांतरण, सामुदायिक परीक्षण, संचालन-रखरखाव मार्गदर्शन, स्वतंत्र निगरानी और सार्वजनिक गुणवत्ता जानकारी इसके ठोस साधन हैं। वित्त, मरम्मत और स्रोत प्रबंधन से जुड़े होने पर ये उपयोगी होंगे। समय-सीमा तक समीक्षा पूरी थी और सौरकरण चर्चा में था। उचित आकलन में रिपोर्ट किए गए बुनियादी ढाँचे के कवरेज तथा विश्वसनीय सेवा प्रदर्शन अलग रखें। इसी तरह क्रियान्वयन प्राथमिकताओं को उन सुधारों से अलग समझें जिनका प्रदर्शन और सत्यापन अभी आवश्यक है। [1][2]
प्रारंभिक परीक्षा हेतु तथ्य
- JJM का सेवा उद्देश्य पर्याप्त मात्रा, निर्धारित गुणवत्ता, नियमितता और दीर्घकालीन वितरण जोड़ता है। [2]
- जल अर्पण में पंद्रह-दिवसीय सामुदायिक परीक्षण है; राज्य दायित्व और स्थानीय संचालन भूमिकाएँ पूरक हैं। [1][2]
- स्वतंत्र निगरानी, ग्राम सभा समीक्षा और सार्वजनिक गुणवत्ता जानकारी जवाबदेही में सहायक हैं; सौरकरण चर्चा थी, पूरा राष्ट्रीय क्रियान्वयन नहीं। [1]
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
समझाइए कि ग्रामीण नल कनेक्शन विस्तार के साथ सेवा-वितरण शासन क्यों आवश्यक है। JJM समीक्षा के तकनीकी और सामुदायिक साधनों की चर्चा कीजिए। (10 अंक; सुझाई गई उत्तर-लंबाई: 150 शब्द)
आदर्श उत्तर
नल कनेक्शन पहुँच का ढाँचा बनाते हैं, लेकिन JJM का उद्देश्य पर्याप्त तथा निर्धारित गुणवत्ता का जल नियमित और दीर्घकालीन रूप से देना भी है। रिसाव, टूट-फूट और बिजली समस्याएँ दिखाती हैं कि कवरेज भरोसेमंद सेवा का विकल्प नहीं। स्रोत स्थिरता भी आवश्यक है। [1][2]
तकनीकी साधनों में स्थानीय संचालन-रखरखाव पुस्तिकाएँ, मरम्मत योजना, स्वतंत्र जल-गुणवत्ता निगरानी और प्राथमिकता के रूप में पहचानी गई स्रोत स्थिरता निर्णय-सहायता प्रणाली हैं। सौरकरण चर्चा में था; उसे बिजली समस्याओं के संदर्भ में देखें, राष्ट्रीय क्रियान्वयन मानकर नहीं। [1]
सामुदायिक साधन ग्राम पंचायत तथा VWSC को जल अर्पण हस्तांतरण, पंद्रह-दिवसीय परीक्षण, गुणवत्ता जानकारी और ग्राम सभा समीक्षा हैं। राज्यों के योजना, क्रियान्वयन तथा रखरखाव दायित्व बने रहते हैं। संचालन नीतियाँ, उपयोगकर्ता शुल्क और पर्याप्त वित्त निरंतरता में सहायक हो सकते हैं। [1][2]
अतः तकनीकी कार्यशीलता और सामुदायिक जवाबदेही साथ चाहिए। कनेक्शन वृद्धि महत्वपूर्ण है, लेकिन टिकाऊ सेवा रखरखाव, व्यवहार्य वित्त, स्रोत प्रबंधन तथा उपयोग योग्य गुणवत्ता जानकारी पर निर्भर है। [1][2]
महत्वपूर्ण शब्द
- संचालन और रखरखाव: निर्माण के बाद योजना चलाना और उसकी परिसंपत्तियाँ कार्यशील रखना। [1][2]
- स्रोत स्थिरता: जल स्रोत की निरंतर सेवा देने की क्षमता। [1]
- स्वतंत्र जल-गुणवत्ता निगरानी: पेयजल गुणवत्ता की स्वतंत्र जाँच, जिसका समीक्षा में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करने के लिए आग्रह किया गया। [1]
- जल अर्पण: औपचारिक हस्तांतरण को सामुदायिक भागीदारी और टिकाऊ संचालन से जोड़ने वाली पहल। [1][2]
स्रोत एवं तथ्य-जाँच
UPSC Prelims अभ्यास प्रश्न
इस संपादकीय पर आधारित मौलिक अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
ग्रामीण पेयजल सेवा के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कनेक्शन कवरेज और विश्वसनीय दीर्घकालीन सेवा क्रियान्वयन के अलग पहलू मापते हैं। 2. ग्रामीण जल योजनाओं का राज्य दायित्व ग्राम पंचायत तथा VWSC को स्थानीय हस्तांतरण के साथ रह सकता है। 3. अकेला सौरकरण वही संचालन समस्या संबोधित करता है जो रिसते वितरण पाइप की मरम्मत करती है। कौन-से कथन सही हैं?
उत्तर और व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A)
कथन 1 बुनियादी ढाँचे और सेवा का अंतर बताता है। कथन 2 राज्य दायित्व तथा स्थानीय भूमिका सही जोड़ता है। कथन 3 गलत है: सौरकरण बिजली व्यवस्था और रिसाव मरम्मत वितरण क्षति से संबंधित है; समीक्षा इन्हें अलग व्यवधान बताती है। A सही है; अन्य विकल्पों में 3 शामिल है। [1][2]
प्रश्न 2
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. जल अर्पण का सामुदायिक परीक्षण — सुचारु स्थानीय हस्तांतरण से पहले संचालन जाँचना 2. स्वतंत्र जल-गुणवत्ता निगरानी — जल गुणवत्ता जवाबदेही के लिए जाँच 3. ग्राम सभा समीक्षा — जल गुणवत्ता निष्कर्षों की समीक्षा और सुधारात्मक उपाय पहचानना कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
प्रश्न 3
कथन-I: स्थानीय हस्तांतरण पूरा होने के साथ संचालन और रखरखाव व्यवस्था होनी चाहिए। कथन-II: हस्तांतरण स्थानीय संचालक बदलता है, जबकि निरंतर सेवा के लिए संचालन मार्गदर्शन और पर्याप्त वित्त चाहिए। कौन-सा विकल्प सही है?
उत्तर और व्याख्या देखें
सही उत्तर: (D)
दोनों कथन PIB की हस्तांतरण, पुस्तिका और वित्त व्यवस्था से निकलते हैं। कथन-II समझाता है कि केवल औपचारिक हस्तांतरण निरंतर संचालन के लिए पर्याप्त क्यों नहीं। D सही है। A संबंध नकारता है और B तथा C एक सही कथन अस्वीकार करते हैं। यह व्याख्या राज्य के व्यापक दायित्व बनाए रखती है। [1][2]