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B.S.H.S SCHOOL · UPSC EDITORIAL ANALYSIS

अध्ययन संग्रह — यह पुरानी घटना पर आधारित विश्लेषण है, आज की खबर नहीं।

पर्यावरणीय-आर्थिक लेखांकन रणनीति: प्राकृतिक संसाधन आँकड़ों की प्राथमिकताएँ

घटना / स्रोत की तारीख: 07 Oct 2026

GS 3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण; भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधन जुटाने, वृद्धि और विकास से संबंधित विषय।

MoSPI की 2026–2030 रणनीति व्यापक लेखा कवरेज, आँकड़ों की कमी और क्रियान्वयन पड़ावों के माध्यम से पहले की रूपरेखा आगे बढ़ाती है। यह विकसित होता मार्गदर्शन है, नई GDP शृंखला या सिद्ध संरक्षण परिणामों की घोषणा नहीं। [1][2]

पहले विषय को समझें

1

पर्यावरणीय लेखों की आवश्यकता

आर्थिक गतिविधियाँ संसाधनों और पारिस्थितिक तंत्रों पर निर्भर हैं, जिनकी स्थिति का व्यवस्थित मापन भी आवश्यक है। पर्यावरणीय-आर्थिक लेखांकन पर्यावरण और अर्थव्यवस्था की जानकारी को एकीकृत सांख्यिकीय ढाँचे में रखकर बेहतर नीतिगत चर्चा में सहायता करता है। [1][2]

2

ढाँचे का अर्थ

SEEA का अर्थ पर्यावरणीय-आर्थिक लेखांकन प्रणाली है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, अर्थात MoSPI, पर्यावरणीय लेखों में यह ढाँचा अपनाता है; यहाँ लेखांकन व्यवस्थित सांख्यिकीय अभिलेख है, संरक्षण परियोजना नहीं। [1][2]

3

सत्यापित विकास

MoSPI पर्यावरणीय लेखों पर 2018 से काम कर रहा है। 2026–2030 रणनीति 2022–2026 की रूपरेखा आगे बढ़ाती है; 27 अप्रैल 2026 को जारी EnviStats प्रश्नोत्तर संबंधित व्याख्यात्मक संसाधन है। [1][2]

4

संस्थागत स्थिति और सीमा

रणनीति राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के लिए विकसित होता मार्गदर्शन बताई गई है। विज्ञप्ति अनिवार्य राज्य अंगीकरण, नई लागू GDP शृंखला या प्रत्येक पर्यावरणीय परिसंपत्ति के लिए विशेष मूल्यांकन नियम स्थापित नहीं करती। [1]

5

लेखों का दायरा

रणनीति में वन, खनिज, मिट्टी, भूमि, जल, कार्बन भंडार, जैव विविधता और पर्यावरण-संबंधी गतिविधियाँ हैं। आँकड़ों की कमी दूर करना, कवरेज बढ़ाना और क्रियान्वयन पड़ाव तय करना इसकी प्राथमिकताएँ हैं। [1]

6

प्राकृतिक पूँजी और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ

प्राकृतिक पूँजी लेखांकन ढाँचे में विचार की जाने वाली पर्यावरणीय परिसंपत्तियाँ हैं। पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ उन तंत्रों के योगदान हैं, जैसे प्रश्नोत्तर में वर्णित परागण सेवाएँ; परिसंपत्ति और उससे मिलने वाली सेवा संबंधित, लेकिन अलग अवधारणाएँ हैं। [2]

7

वर्तमान विज्ञप्ति और घटनाक्रम

7 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति संकलित रणनीति की घोषणा करती है; अलग शुभारंभ तिथि नहीं बताई गई। यह प्राकृतिक संसाधन लेखांकन को राष्ट्रीय लेखा प्रणाली, अर्थात SNA, 2025 से जोड़ती है; प्रश्नोत्तर SEEA और SNA 2025 दोनों अवधारणाओं से तालमेल समझाता है। [1][2]

संदर्भ: यह विषय क्यों महत्वपूर्ण है

रणनीति पर्यावरणीय लेखांकन को नई गतिविधि बताने के बजाय स्थापित सांख्यिकीय कार्यक्रम आगे बढ़ाती है। 2018 से काम और पहले की रूपरेखा उसका घटनाक्रम देते हैं। EnviStats प्रश्नोत्तर जैव विविधता, फसल और मिट्टी, वन, खनिज तथा ऊर्जा, महासागर, अवशिष्ट और जल तथा मछली जैसे क्षेत्रों में अवधारणाएँ समझाता है। दोनों विकास सांख्यिकीय कवरेज और पर्यावरणीय परिसंपत्तियों, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं तथा आर्थिक गतिविधियों के संबंध की समझ बढ़ाने के प्रयास दर्शाते हैं। व्यापकता के साथ स्पष्ट व्याख्या भी आवश्यक है। [1][2]

परिचय

वर्तमान विकास 2026–2030 की भविष्योन्मुख रणनीति है, जिसकी घोषणा 7 अक्टूबर की विज्ञप्ति में हुई। यह पर्यावरणीय लेखों के लिए प्राथमिकता क्षेत्र, आँकड़ों की कमी और क्रियान्वयन पड़ाव पहचानती है। इसका महत्व फैलते सांख्यिकीय क्षेत्र को व्यवस्थित करने में है, सभी लेख पूरे होने के दावे में नहीं। राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के लिए विकसित होता मार्गदर्शन बताने से राष्ट्रीय रूपरेखा, विशेष लेखों का संकलन और बाद में उन पर आधारित नीतिगत निर्णयों का अंतर बना रहता है। [1]

प्रमुख मुद्दे

  • लेखा कवरेज के लिए केवल संसाधन क्षेत्रों की सूची पर्याप्त नहीं है। प्रश्नोत्तर भौतिक और मौद्रिक तरीकों तथा समय के साथ प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरणीय परिसंपत्तियों में बदलाव देखने के लिए अवलोकनों को व्यवस्थित करना समझाता है। पारिस्थितिकी तंत्र लेखांकन विस्तार, दशा और सेवा प्रवाह अलग करता है: तंत्र का क्षेत्रफल, उसकी स्थिति और उसके योगदान योजना के अलग प्रश्नों का उत्तर देते हैं। इन आयामों को जोड़ने से संसाधन निर्भरताएँ और विकास तथा संरक्षण के बीच समझौते समझने में सहायता मिल सकती है। रणनीति की आँकड़ा-कमी प्राथमिकताएँ बताती हैं कि आगे संकलन कहाँ आवश्यक है। [1][2]

महत्व

  • एकीकृत ढाँचा संसाधन जानकारी को आर्थिक जानकारी के साथ रखने में सहायता कर सकता है, जिससे दोनों अलग विवरण बनकर न रह जाएँ। व्यापक कवरेज योजना में प्रासंगिक पर्यावरणीय निर्भरताएँ अधिक स्पष्ट कर सकता है। SNA 2025 और SEEA से संबंध सांख्यिकीय लेखांकन में वैचारिक तालमेल दर्शाता है; राज्य तथा केंद्रशासित प्रदेश मार्गदर्शन साझा दिशा दे सकता है। ये संभावित विश्लेषणात्मक लाभ हैं। लेखा या रणनीति का अस्तित्व स्वयं बेहतर पारिस्थितिकी स्थिति अथवा सफल संरक्षण कार्रवाई का प्रमाण नहीं है। [1][2]

चुनौतियाँ और संतुलित विश्लेषण

  • रणनीति आँकड़ों की कमी स्पष्ट रूप से स्वीकार करती है, इसलिए क्रियान्वयन में केवल विषय-सूची बढ़ाने के बजाय असमान साक्ष्य संबोधित करने होंगे। व्यापक दायरा अलग संसाधन क्षेत्रों में सावधान क्रम-निर्धारण माँगता है। उपयोगकर्ता लेखांकन ढाँचे को घोषित नीति साधन, अनिवार्य राज्य कार्यक्रम या बदला GDP अनुमान भी समझ सकते हैं। विज्ञप्ति से ये निष्कर्ष स्वतः नहीं निकलते। क्या मापा गया है, क्या नियोजित है और आँकड़े किस निष्कर्ष का समर्थन कर सकते हैं—यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण क्रियान्वयन चुनौती है। [1][2]

आगे की राह

  • उचित तरीका प्रत्येक प्राथमिक लेखे को संबंधित आँकड़ा-कमी और स्पष्ट संकलन पड़ाव से जोड़ना होगा। राज्य तथा केंद्रशासित प्रदेश मार्गदर्शन की बताई स्थिति समझते हुए अपना कार्य व्यवस्थित कर सकते हैं। सांख्यिकीय संचार में प्रश्नोत्तर की सहज शैली से परिसंपत्तियाँ, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ और लेखा कवरेज समझाने चाहिए। नीति उपयोगकर्ता दर्ज पर्यावरणीय जानकारी तथा संरक्षण परिणामों के प्रमाण अलग रखें। घोषणा में निर्दिष्ट न होने वाली मूल्यांकन पद्धतियाँ या अनिवार्य दायित्व मान लेना उचित नहीं होगा; उपयोग की सीमा स्पष्ट रहनी चाहिए। [1][2]

निष्कर्ष

रणनीति का योगदान बढ़ते पर्यावरण-सांख्यिकी कार्यक्रम को व्यवस्थित दिशा देना है। उसका घटनाक्रम, व्यापक संसाधन दायरा और आँकड़ा-कमी पर स्पष्ट ध्यान पर्यावरण शासन तथा आर्थिक योजना दोनों के लिए प्रासंगिक हैं। लेकिन रूपरेखा सक्षम बनाने वाला सांख्यिकीय दस्तावेज है, जिसकी प्रभावशीलता बाद के संकलन और जिम्मेदार उपयोग पर निर्भर होगी। वर्तमान आकलन यही होना चाहिए कि भारत ने लेखांकन प्राथमिकताएँ और मार्गदर्शन स्पष्ट किया है; केवल घोषणा से पूर्ण राष्ट्रव्यापी कवरेज या बेहतर पर्यावरणीय परिणाम निष्कर्षित नहीं किए जा सकते। [1][2]

प्रारंभिक परीक्षा हेतु तथ्य

  • SEEA पर्यावरणीय और आर्थिक आँकड़े एकीकृत करता है; SNA का अर्थ राष्ट्रीय लेखा प्रणाली है। [1][2]
  • प्राकृतिक पूँजी और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ संबंधित अवधारणाएँ हैं; सांख्यिकीय लेखा और संरक्षण परिणाम अलग हैं। [2]
  • रणनीति पहले की रूपरेखा आगे बढ़ाकर कमियाँ और पड़ाव पहचानती है; इसे विकसित होता मार्गदर्शन बताया गया है। [1]

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

चर्चा कीजिए कि पर्यावरणीय-आर्थिक लेखांकन संसाधन-संवेदनशील योजना में कैसे सहायक हो सकता है। 2026–2030 रणनीति की क्रियान्वयन और व्याख्या संबंधी सीमाएँ बताइए। (10 अंक; सुझाई गई उत्तर-लंबाई: 150 शब्द)

आदर्श उत्तर

पर्यावरणीय-आर्थिक लेखांकन पर्यावरणीय परिसंपत्तियों और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को एकीकृत सांख्यिकीय ढाँचे में रखता है। MoSPI का SEEA-आधारित कार्य आर्थिक जानकारी के साथ संसाधन निर्भरता स्पष्ट करके संसाधन-संवेदनशील योजना में सहायता कर सकता है। [1][2]

2026–2030 रणनीति पूर्व रूपरेखा आगे बढ़ाती है और वन, खनिज, मिट्टी, भूमि, जल, कार्बन भंडार, जैव विविधता तथा पर्यावरण-संबंधी गतिविधियाँ समेटती है। आँकड़ा-कमी, प्राथमिकताएँ और पड़ाव आगे संकलन की दिशा देते हैं। EnviStats प्रश्नोत्तर प्राकृतिक पूँजी तथा पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का अंतर समझाता है। [1][2]

क्रियान्वयन में उपयोग योग्य आँकड़े और संसाधन क्षेत्रों का सावधान क्रम चाहिए। व्याख्या में रणनीतिक कवरेज तथा पूरे लेखे, और सांख्यिकीय जानकारी तथा संरक्षण परिणाम अलग रखने होंगे। यह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए विकसित होता मार्गदर्शन है; अनिवार्य अंगीकरण, नई GDP शृंखला या अनिर्दिष्ट मूल्यांकन नियम स्थापित नहीं करता। व्यावहारिक उपयोगिता कमियाँ दूर करने और लेखों का योजना में जिम्मेदारी से उपयोग करने पर निर्भर होगी। [1][2]

महत्वपूर्ण शब्द

  • SEEA: पर्यावरणीय लेखों के लिए अपनाई गई पर्यावरणीय-आर्थिक लेखांकन प्रणाली। [1][2]
  • प्राकृतिक पूँजी: एकीकृत लेखांकन ढाँचे में विचार की गई पर्यावरणीय परिसंपत्तियाँ। [2]
  • पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ: तंत्रों के योगदान, जिनमें EnviStats का परागण सेवा क्षेत्र शामिल है। [2]
  • क्रियान्वयन पड़ाव: रणनीति के लेखांकन कार्य को आगे बढ़ाने का निर्धारित चरण। [1]

स्रोत एवं तथ्य-जाँच

  1. Document on Strategy for Environmental Economic Accounts in India 2026–2030
  2. EnviStats India Frequently Asked Questions 2026

UPSC Prelims अभ्यास प्रश्न

इस संपादकीय पर आधारित मौलिक अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

निम्नलिखित में से कौन रणनीति के पर्यावरणीय लेखांकन दायरे में स्पष्ट रूप से शामिल हैं? 1. कार्बन भंडार 2. मिट्टी और भूमि 3. जैव विविधता 4. पर्यावरण-संबंधी गतिविधियाँ कितने सही हैं?

  1. केवल दो
  2. केवल तीन
  3. सभी चार
  4. केवल एक
उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C)

चारों रणनीति के घोषित दायरे में हैं। कार्बन भंडार, मिट्टी और भूमि, जैव विविधता तथा पर्यावरण-संबंधी गतिविधियाँ अलग क्षेत्र हैं। C सही है; A, B और D कम गिनते हैं। उनका समावेश लेखांकन का दायरा बताता है, हर लेखे का पूरा होना नहीं। [1]

प्रश्न 2

निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. SEEA — एकीकृत पर्यावरणीय-आर्थिक सांख्यिकीय ढाँचा 2. प्राकृतिक पूँजी — लेखांकन में पर्यावरणीय परिसंपत्तियाँ 3. पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ — तंत्रों द्वारा दिए गए योगदान कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 1 और 3
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3
उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (D)

युग्म 1 MoSPI द्वारा अपनाया ढाँचा बताता है। युग्म 2 परिसंपत्ति और युग्म 3 योगदान की अवधारणा बताता है, जिसका उदाहरण परागण सेवा है। सभी सही हैं, इसलिए D उत्तर है। A, B और C एक सही युग्म छोड़ते हैं। परिसंपत्तियाँ और उनकी सेवाएँ वैचारिक रूप से अलग हैं। [1][2]

प्रश्न 3

योजना इकाई वर्ष के आरंभ और अंत में उपलब्ध जल तथा वर्ष के दौरान उपयोग किए गए जल को भौतिक मात्राओं में दर्ज करती है। इन अवलोकनों का अंतर कौन-सी व्याख्या सबसे सही बताती है?

  1. आरंभिक और अंतिम मात्रा परिसंपत्ति भंडार दर्शाती हैं; वार्षिक जल उपयोग संसाधन प्रवाह दर्शाता है।
  2. आरंभिक और अंतिम मात्रा संसाधन प्रवाह दर्शाती हैं; वार्षिक जल उपयोग परिसंपत्ति भंडार दर्शाता है।
  3. आरंभिक और अंतिम मात्रा का अंतर अनिवार्य रूप से वार्षिक जल उपयोग के बराबर होता है।
  4. वार्षिक जल उपयोग पारिस्थितिकी तंत्र की दशा मापता है, जबकि आरंभिक और अंतिम मात्रा पारिस्थितिकी तंत्र सेवा प्रवाह मापती हैं।
उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A)

A किसी समय उपलब्ध मात्रा और एक अवधि में उपयोग का अंतर बताता है तथा प्रश्नोत्तर की पर्यावरणीय परिसंपत्ति और संसाधन प्रवाह अवधारणाएँ लागू करता है। B भंडार और प्रवाह उलटता है। C मानता है कि भंडार में बदलाव का एकमात्र कारण उपयोग है, जो इन अवलोकनों से स्थापित नहीं होता। D निर्दिष्ट परिसंपत्ति और उपयोग के स्थान पर तंत्र की दशा तथा सेवा प्रवाह रखता है। भौतिक इकाइयाँ भंडार और प्रवाह दोनों व्यक्त कर सकती हैं। [2]

प्रश्न 4

पारिस्थितिकी तंत्र लेखांकन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. तंत्र का विस्तार और उसकी दशा उसके अलग आयाम दर्शाते हैं। 2. पारिस्थितिकी तंत्र सेवा प्रवाह भौतिक और मौद्रिक रूपों में व्यक्त किए जा सकते हैं। 3. तंत्र का विस्तार अपरिवर्तित रहने से उसकी दशा और सेवा प्रवाह अपरिवर्तित होने का निष्कर्ष निकालना पर्याप्त रूप से संभव है। कौन-से कथन सही हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3
उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B)

कथन 1 सही है: विस्तार तंत्र के क्षेत्रफल और दशा उसकी स्थिति से संबंधित है। कथन 2 सही है: प्रश्नोत्तर भौतिक तथा मौद्रिक सेवा प्रवाह समेटता है। कथन 3 गलत है: क्षेत्रफल अपरिवर्तित रहने से दशा या तंत्र के योगदान अपरिवर्तित होना स्थापित नहीं होता; इन आयामों के अलग अवलोकन चाहिए। B में सही कथन हैं; A में 2 छूटा है, जबकि C और D में 3 शामिल है। [2]