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B.S.H.S SCHOOL · UPSC EDITORIAL ANALYSIS

अध्ययन संग्रह — यह पुरानी घटना पर आधारित विश्लेषण है, आज की खबर नहीं।

भारत–जापान JCM: जलवायु समझौते से परियोजना प्रक्रिया तक

घटना / स्रोत की तारीख: 30 Sep 2026

GS 2: भारत से संबंधित द्विपक्षीय समझौते; GS 3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी—विकास और उनके अनुप्रयोग।

PIB की 5 अक्टूबर की व्याख्या में 30 सितंबर को जारी परिचालन पुस्तिका का विवरण है। यह परियोजना प्रस्ताव, संस्थागत परीक्षण और क्रेडिट प्राधिकरण को जोड़ती है; इससे क्रेडिट जारी हो जाने की पुष्टि नहीं होती। [1]

पहले विषय को समझें

1

उद्देश्य और आवश्यकता

संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र अर्थात JCM कम उत्सर्जन वाली प्रौद्योगिकियों में सहयोग का माध्यम है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने जलवायु वित्त तथा भारत में उत्सर्जन में कमी और निष्कासन को इसके अपेक्षित योगदान बताया है। [1]

2

संयुक्त क्रेडिटिंग का अर्थ

JCM पात्र परियोजनाओं को उनसे बनने वाले क्रेडिट के लिए निर्धारित द्विपक्षीय प्रक्रिया से जोड़ता है। क्रेडिट उस प्रक्रिया का संभावित लेखांकन परिणाम है; तंत्र की घोषणा किसी परियोजना को क्रेडिट मिल जाने का प्रमाण नहीं है। [1][2]

3

सत्यापित घटनाक्रम

वर्तमान विज्ञप्ति सहयोग ज्ञापन की तारीख 7 अगस्त 2025 और कार्यान्वयन नियम की तारीख 8 जून 2026 बताती है। परिचालन पुस्तिका 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में जारी हुई और PIB ने 5 अक्टूबर 2026 को उसकी व्याख्या प्रकाशित की। [1]

4

संस्थागत ढाँचा

PIB इस सहयोग को पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के अंतर्गत रखता है। इसके अनुसार अनुच्छेद 6 के कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय नामित एजेंसी संबंधित कम उत्सर्जन वाली प्रौद्योगिकियों को मंजूरी देती है। [2]

5

कार्यादेश और सीमाएँ

व्यवस्था में निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, क्षमता निर्माण और स्थानीयकरण की परिकल्पना है। मंत्रालय के अनुसार बनने वाले क्रेडिट का अंतरराष्ट्रीय व्यापार भारत की राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान अर्थात NDC प्रतिबद्धताओं पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालना चाहिए। [2]

6

परियोजना की शब्दावली

परियोजना विचार टिप्पणी वह प्रारंभिक प्रस्तुति है जिसका पुस्तिका की प्रक्रिया में उल्लेख है। जारी करना निर्धारित प्रक्रिया से क्रेडिट बनाने से संबंधित है, जबकि प्राधिकरण उसी प्रक्रिया में अलग से संबोधित अनुमति का विषय है। [1]

7

वर्तमान विकास

पुस्तिका परियोजना विचार टिप्पणी प्रस्तुत करने से लेकर JCM क्रेडिट जारी करने और उनके प्राधिकरण तक की प्रक्रियाएँ बताती है। इससे परिचालन मार्गदर्शन मिलता है; विज्ञप्ति किसी विशेष परियोजना से क्रेडिट जारी होने या सिद्ध उत्सर्जन कटौती की पुष्टि नहीं करती। [1]

संदर्भ: यह विषय क्यों महत्वपूर्ण है

तत्काल विकास परिचालन पुस्तिका की व्याख्या है, 5 अक्टूबर को नया शुभारंभ नहीं। घटनाक्रम समझना जरूरी है क्योंकि समझौता, कार्यान्वयन नियम और परियोजना प्रक्रियाएँ अलग कार्य करते हैं। पहले सहयोग का ढाँचा आया, फिर नियम और उसके बाद पुस्तिका। ये मिलकर ऐसा संस्थागत रास्ता बताते हैं जिससे प्रस्तावित कम उत्सर्जन वाली परियोजनाएँ आगे बढ़ सकती हैं। इससे यह सिद्ध नहीं होता कि किसी विशेष परियोजना ने पूरा रास्ता पार कर लिया है। प्रक्रिया की उपलब्धता और उसके पूरा होने के बीच का अंतर बनाए रखना इस समाचार को सही समझने का आधार है। [1]

परिचय

मुख्य नीतिगत प्रश्न है कि द्विपक्षीय जलवायु सहयोग परियोजनाओं के लिए प्रशासनिक रूप से उपयोगी प्रक्रिया कैसे बने। पुस्तिका परियोजना विचार टिप्पणी से क्रेडिट जारी करने और प्राधिकरण तक के चरण व्यवस्थित करके इसका आंशिक उत्तर देती है। इससे परियोजना की तैयारी और क्रेडिट संबंधी निर्णयों का संबंध अधिक स्पष्ट होता है। मंत्रालय तंत्र को वित्त और प्रौद्योगिकी परिनियोजन का सहायक बताता है। फिर भी ये उद्देश्य हैं, जिनकी प्राप्ति परियोजनाओं के लागू प्रक्रियाओं से गुजरने पर निर्भर करती है। केवल मार्गदर्शन जारी होना निवेश या उत्सर्जन संबंधी परिणामों के बराबर नहीं है। [1][2]

प्रमुख मुद्दे

  • वित्त की आवश्यकता और भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं की रक्षा, दोनों महत्वपूर्ण हैं। मंत्रालय भारत की दीर्घकालीन कम उत्सर्जन वाली विकास रणनीति को लागत-सघन बताता है और उसके लिए व्यवहार्यता अंतर की भरपाई करने वाले वित्त की आवश्यकता बताता है। JCM निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, क्षमता निर्माण और घरेलू साझेदारियों से उपकरण, मशीनरी, उत्पाद, प्रणालियों तथा अवसंरचना के स्थानीयकरण की परिकल्पना करता है। ये माध्यम संभावित क्रेडिट आय से आगे कार्यान्वयन की बाधाएँ दूर करने में सहायक हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार भारत की NDC प्रतिबद्धताओं पर प्रतिकूल प्रभाव भी नहीं डाले। इसलिए वित्तीय सहायता और राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं की सुरक्षा इस ढाँचे में पूरक उद्देश्य हैं। [2]

महत्व

  • पुस्तिका का महत्व प्रक्रियागत स्पष्टता में है। परियोजना विकासकर्ता समझ सकते हैं कि प्रारंभिक प्रस्ताव केवल एक चरण है, जबकि सार्वजनिक संस्थाएँ प्रौद्योगिकी की मंजूरी को बाद की क्रेडिट प्रक्रियाओं से अलग पहचान सकती हैं। भारत–जापान सहयोग में इससे निवेश की मंशा और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच अधिक स्पष्ट संपर्क बनता है। स्थानीयकरण और क्षमता निर्माण सफलतापूर्वक लागू होने पर घरेलू भागीदारी मजबूत कर सकते हैं। हालांकि संबंधित विज्ञप्तियाँ पुस्तिका के कारण आए अतिरिक्त वित्त, प्रौद्योगिकी अपनाने या उत्सर्जन कटौती को परिमाण में नहीं बतातीं। इसलिए संभावित महत्व और मापे गए परिणाम अलग रहने चाहिए। [1][2]

चुनौतियाँ और संतुलित विश्लेषण

  • कार्यान्वयन में प्रस्तावित परियोजना, प्रक्रिया से गुजर रहे आवेदन, जारी क्रेडिट और अधिकृत क्रेडिट के बीच भेद सुरक्षित रखना होगा। इन्हें समान मानने से प्रगति बढ़ाकर दिखाई जाएगी। दूसरी चुनौती प्रौद्योगिकी संबंधी निर्णयों को भारत की NDC प्रतिबद्धताओं की रक्षा से जोड़ना है। PIB कार्यान्वयन नियम और समान समझौते अंतिम करने के मंत्रिमंडल-अधिकृत ढाँचे में संबंधित मंत्रालयों तथा विदेश मंत्रालय से परामर्श का भी उल्लेख करता है। इसलिए समन्वय में तकनीकी और अंतरसरकारी दोनों जिम्मेदारियाँ हैं। यह केवल व्यक्तिगत निवेशकों के बीच समझौते का मामला नहीं है; सार्वजनिक निर्णयों का क्रम भी महत्वपूर्ण है। [1][2]

आगे की राह

  • PIB द्वारा बताए ढाँचे के भीतर हर प्रक्रियागत चरण परियोजना प्रस्तुतकर्ताओं और जिम्मेदार संस्थाओं के लिए समझने योग्य होना चाहिए। आवेदक प्रस्तावित प्रौद्योगिकी को संबंधित मंजूरी प्रक्रिया से जोड़ें तथा निवेश, स्थानीयकरण और क्षमता निर्माण की योजना स्पष्ट करें। संस्थाएँ बताएँ कि परियोजना अभी विचाराधीन है या किसी क्रेडिट संबंधी निर्णय तक पहुँची है। वास्तविक जारीकरण और प्राधिकरण की अलग जानकारी प्रगति का आकलन आसान करेगी। इससे अपेक्षित लाभों को हासिल परिणाम मानने से बचा जा सकेगा। ये विश्लेषण पर आधारित सुझाव हैं, विज्ञप्तियों में घोषित अतिरिक्त परिचालन निर्देश नहीं। [1][2]

निष्कर्ष

पुस्तिका द्विपक्षीय जलवायु सहयोग का एक दिनांकित प्रक्रियागत विकास है। उसका तत्काल महत्व समझाए गए परियोजना मार्ग में है। आगे परिणामों का आकलन पूरे हुए निर्णयों और सत्यापित परियोजना प्रदर्शन से होना चाहिए, साथ ही भारत की NDC प्रतिबद्धताओं की रक्षा का घोषित मानदंड बना रहना चाहिए। [1][2]

प्रारंभिक परीक्षा हेतु तथ्य

  • क्रम: सहयोग ज्ञापन → कार्यान्वयन नियम → परिचालन पुस्तिका। पुस्तिका 30 सितंबर को जारी हुई; व्याख्यात्मक विज्ञप्ति 5 अक्टूबर को आई। [1]
  • प्रौद्योगिकी मंजूरी, परियोजना प्रस्तुति, क्रेडिट जारीकरण और प्राधिकरण अलग चरण हैं। निवेश और स्थानीयकरण अपेक्षित विशेषताएँ हैं, जबकि भारत की NDC प्रतिबद्धताओं की रक्षा घोषित सरकारी चिंता है। [1][2]

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

भारत–जापान संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र में प्रक्रियागत स्पष्टता, भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं की रक्षा करते हुए कम उत्सर्जन वाले निवेश को कैसे सुगम बना सकती है? संस्थागत जिम्मेदारियों और कार्यान्वयन सीमाओं के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (10 अंक; सुझाई गई उत्तर लंबाई: 150 शब्द)

आदर्श उत्तर

भारत–जापान संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र कम उत्सर्जन वाले सहयोग को परियोजना प्रक्रिया से जोड़ता है। परिचालन पुस्तिका परियोजना विचार टिप्पणी से क्रेडिट जारी करने और प्राधिकरण तक का मार्ग बताती है। इससे तैयारी और बाद के प्रशासनिक निर्णयों का अंतर स्पष्ट होता है। [1]

पात्र परियोजनाओं पर विचार का रास्ता समझाकर प्रक्रियागत स्पष्टता निवेश सुगम बना सकती है। PIB प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, क्षमता निर्माण और स्थानीयकरण भी बताता है। इसलिए सहयोग का उद्देश्य क्रेडिट व्यापार से व्यापक है। अनुच्छेद 6 के कार्यान्वयन की राष्ट्रीय नामित एजेंसी संबंधित प्रौद्योगिकियों को मंजूरी देती है। [2]

भारत की प्रतिबद्धताओं की रक्षा अनिवार्य है: मंत्रालय के अनुसार अंतरराष्ट्रीय व्यापार NDC प्रतिबद्धताओं पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डाले। कार्यान्वयन में मंजूरी, परियोजना प्रक्रिया, जारीकरण और प्राधिकरण की प्रगति अलग बतानी चाहिए। पुस्तिका मार्गदर्शन स्थापित करती है, सिद्ध उत्सर्जन कटौती नहीं। प्रभावशीलता का मूल्यांकन पूरे निर्णयों, परियोजना प्रदर्शन और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता की सुरक्षा से होना चाहिए। [1][2]

महत्वपूर्ण शब्द

  • संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र: कम उत्सर्जन वाली परियोजनाओं और उनसे बनने वाले क्रेडिट के लिए वर्णित द्विपक्षीय ढाँचा। [1][2]
  • स्थानीयकरण: संबंधित प्रौद्योगिकियों के परिनियोजन में घरेलू भागीदारी विकसित करना। [2]
  • NDC: राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान, अर्थात मंत्रालय द्वारा उल्लिखित राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताएँ; बनने वाले क्रेडिट का व्यापार भारत की प्रतिबद्धताओं पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डाले। [2]

स्रोत एवं तथ्य-जाँच

  1. India and Japan Launch Operational Manual for the Joint Crediting Mechanism
  2. India and Japan sign Memorandum of Cooperation on Joint Crediting Mechanism under Article 6.2

UPSC Prelims अभ्यास प्रश्न

इस संपादकीय पर आधारित मौलिक अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

भारत–जापान JCM के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत की दीर्घकालीन कम उत्सर्जन वाली विकास रणनीति को लागत-सघन और व्यवहार्यता अंतर की भरपाई करने वाले वित्त की आवश्यकता वाली बताता है। 2. परिचालन पुस्तिका परियोजना विचार टिप्पणी की प्रस्तुति को अंतिम क्रेडिट संबंधी चरण मानती है। 3. बनने वाले क्रेडिट के अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत की NDC प्रतिबद्धताओं की रक्षा स्पष्ट विचारणीय पक्ष है। कौन-से कथन सही हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 1 और 3
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3
उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B)

कथन 1 सही है: मंत्रालय वित्तीय आवश्यकता के आधार के रूप में लागत-सघनता और व्यवहार्यता अंतर की भरपाई करने वाले वित्त की जरूरत बताता है। कथन 2 गलत है: पुस्तिका प्रारंभिक टिप्पणी से जारीकरण और प्राधिकरण तक जाती है। कथन 3 सही है: मंत्रालय कहता है कि व्यापार भारत की NDC प्रतिबद्धताओं को प्रतिकूल रूप से प्रभावित नहीं करे। इसलिए B सही है; A और D में गलत कथन 2 है, जबकि C सही कथन 1 छोड़ता है। [1][2]

प्रश्न 2

मंत्रिमंडल-अधिकृत JCM ढाँचे के निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय — कार्यान्वयन नियम अंतिम करना 2. संबंधित मंत्रालय और विदेश मंत्रालय — नियमों तथा समान समझौतों पर परामर्श 3. विदेश मंत्रालय — संबंधित कम उत्सर्जन वाली प्रौद्योगिकियों की मंजूरी कितने युग्म सही सुमेलित हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं
उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B)

युग्म 1 और 2 PIB द्वारा वर्णित मंत्रिमंडल के प्राधिकरण से मेल खाते हैं। युग्म 3 प्रौद्योगिकी मंजूरी गलत संस्था को देता है: PIB इस भूमिका के लिए NDAIAPA बताता है, जबकि विदेश मंत्रालय परामर्श में शामिल है। ठीक दो युग्म सही हैं; इसलिए A, C और D गलत हैं। [2]

प्रश्न 3

कथन-I: JCM का अपेक्षित योगदान अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट व्यापार का माध्यम उपलब्ध कराने से व्यापक है। कथन-II: इसमें कम उत्सर्जन वाले उपकरणों और प्रणालियों के स्थानीयकरण हेतु घरेलू साझेदारियों के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा क्षमता निर्माण की परिकल्पना है। कौन-सा विकल्प सही है?

  1. दोनों कथन सही हैं और कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है
  2. दोनों कथन सही हैं, लेकिन कथन-II, कथन-I की व्याख्या नहीं करता
  3. कथन-I सही है, लेकिन कथन-II गलत है
  4. कथन-I गलत है, लेकिन कथन-II सही है
उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A)

दोनों कथन समर्थित हैं। घरेलू तकनीकी क्षमता और साझेदारियाँ क्रेडिट व्यापार से अलग अपेक्षित योगदान हैं; इसलिए II, I की व्याख्या करता है। B संबंध नकारता है; C समर्थित स्थानीयकरण और क्षमता निर्माण को नकारता है; D तंत्र का योगदान अनुचित रूप से केवल व्यापार तक सीमित करता है। [2]