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B.S.H.S SCHOOL · UPSC EDITORIAL ANALYSIS

अध्ययन संग्रह — यह पुरानी घटना पर आधारित विश्लेषण है, आज की खबर नहीं।

जल अर्पण: जल परिसंपत्तियों से समुदाय-प्रबंधित सेवाओं की ओर

घटना / स्रोत की तारीख: 02 Oct 2026

GS 2: स्थानीय स्तर तक शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ; विभिन्न क्षेत्रों में विकास हेतु सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप तथा उनके निर्माण और कार्यान्वयन से उत्पन्न मुद्दे।

3 अक्टूबर की रिपोर्ट 2 अक्टूबर की गांधी जयंती विशेष ग्राम सभाओं में हुए जल अर्पण का विवरण देती है। पूरी योजनाएँ निर्धारित परीक्षण के बाद स्थानीय निकायों को सौंपी गईं। डिजिटल अभिलेख, परिसंपत्तियों का स्थानांकन और समुदाय की जल गुणवत्ता निगरानी संचालन तथा रखरखाव की ओर बदलाव में सहायक हैं।[1][2]

पहले विषय को समझें

1

मिशन और सेवा उद्देश्य

अगस्त 2019 से राज्यों के साथ लागू जल जीवन मिशन (JJM) घरेलू नलों से सुनिश्चित पेयजल चाहता है: प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 55 लीटर, BIS:10500 के अनुरूप गुणवत्ता तथा नियमित और दीर्घकालिक आपूर्ति। जल अर्पण इसके पुनर्गठित JJM 2.0 चरण में पूरी योजनाओं के समुदाय प्रबंधन को समर्थन देता है।[1][2]

2

स्थानीय प्रबंधन का अर्थ

ग्राम पंचायत और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियाँ निर्धारित परीक्षणों के बाद पूरी योजनाएँ प्राप्त करती हैं। संचालन और रखरखाव का अर्थ सेवा चालू रखना तथा उसे शुरू किए जाने के बाद ढाँचे की देखभाल करना है।[1]

3

सत्यापित कालक्रम

जुलाई 2026 की PIB विज्ञप्ति ने हस्तांतरण व्यवस्था और परीक्षण की शर्त बताई थी। गांधी जयंती के आयोजन 2 अक्टूबर को हुए; PIB ने 3 अक्टूबर 2026 को उनका विवरण दिया।[1][2]

4

संस्थागत जिम्मेदारियाँ

योजना, कार्यान्वयन और संचालन तथा रखरखाव राज्यों की जिम्मेदारी हैं। समुदाय को हस्तांतरण में निर्वाचित प्रतिनिधि, ग्राम सभाएँ और स्थानीय लोग शामिल होते हैं; इससे राज्यों की बताई गई जिम्मेदारियाँ समाप्त नहीं होतीं।[2]

5

हस्तांतरण से पहले परीक्षण

समुदाय-प्रबंधित पाइप जल व्यवस्था की पुस्तिका ग्राम पंचायत, ग्राम जल समिति या पानी समिति की भागीदारी से पंद्रह दिन का परीक्षण अनिवार्य करती है। परीक्षण के बाद सेवा शुरू करना पूरी योजनाओं को निर्माणाधीन परियोजनाओं से अलग करता है।[1][2]

6

डिजिटल साधन

जल अर्पण मॉड्यूल हस्तांतरण दर्ज करता है; सुजलाम भारत परिसंपत्तियों और स्रोतों का भौगोलिक स्थानांकन करता है। स्थानांकन किसी परिसंपत्ति से स्थान की जानकारी जोड़ता है; वह स्वयं जल गुणवत्ता की जाँच नहीं है।[1]

7

वर्तमान बताई गई स्थिति

1,850 से अधिक ग्राम पंचायतों या गाँवों में जल अर्पण हुआ और 346 प्रमाणपत्र जारी हुए। मंत्रालय के अनुसार 15.96 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों के पास नल कनेक्शन हैं, जो 82% से अधिक हैं; केवल कनेक्शन निर्बाध सुरक्षित आपूर्ति सिद्ध नहीं करते।[1]

संदर्भ: यह विषय क्यों महत्वपूर्ण है

वर्तमान रिपोर्ट 2 अक्टूबर की गांधी जयंती विशेष ग्राम सभाओं का विवरण देती है, जबकि PIB ने इसे 3 अक्टूबर को प्रकाशित किया। 1,850 से अधिक ग्राम पंचायतों या गाँवों में जल अर्पण हुआ। इसलिए विकास हस्तांतरण और समुदाय की भागीदारी का बताया गया आयोजन है, नया राष्ट्रीय जल कार्यक्रम नहीं।[1]

जुलाई का विवरण हस्तांतरण को JJM 2.0 से जोड़ता है: मार्च 2026 में मंत्रिमंडल ने दिसंबर 2028 तक विस्तार, बढ़ा परिव्यय और ग्रामीण पेयजल सुधारों पर केंद्रित पुनर्गठित कार्यान्वयन मंजूर किया। प्रत्येक राज्य या केंद्रशासित प्रदेश को व्यापक कार्यान्वयन एवं सुधार योजना (CIRP) तैयार करनी है, जो नियोजन, प्राथमिकता, सुधार, धन आवंटन और निगरानी का मार्गदर्शन करेगी। अक्टूबर के आयोजन इसी व्यापक सुधार व्यवस्था में समुदाय के स्वामित्व को आगे बढ़ाते हैं।[1][2]

परिचय

जल अर्पण भौतिक ढाँचे को लगातार सेवा देने की जिम्मेदारी से जोड़ता है। पूरी योजनाएँ संचालन और रखरखाव के लिए ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों को सौंपी गईं। प्रमुख शासन प्रश्न यह है कि निर्माण परियोजना के समुदाय-प्रबंधित सेवा बनने के बाद हस्तांतरण, वित्तपोषण, निगरानी और रखरखाव मिलकर कैसे काम करते हैं।[1][2]

प्रमुख मुद्दे

  • डिजिटल कार्य अलग हैं। जल अर्पण मॉड्यूल योजना का हस्तांतरण दर्ज करता है और हिंदी, अंग्रेजी तथा 17 अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में प्रमाणपत्र देता है। सुजलाम भारत जलापूर्ति परिसंपत्तियों और स्रोतों के स्थान दर्ज करता है। इनमें से किसी को आयोजन में बताए मैदानी जल परीक्षण किट प्रदर्शनों और जल गुणवत्ता निगरानी के समान नहीं मानना चाहिए।[1]
  • मंत्रालय के अनुसार आयोजन में 2,691 परिसंपत्तियों का स्थानांकन हुआ, जिनमें लगभग 700 स्रोत शामिल थे। स्रोत परिसंपत्तियों की कुल संख्या के भीतर हैं, उसमें जोड़ने वाली अतिरिक्त श्रेणी नहीं। 346 हर घर जल प्रमाणपत्र अलग प्रशासनिक परिणाम हैं; उन्हें जल गुणवत्ता के स्वतंत्र प्रयोगशाला माप के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए।[1]

महत्व

  • स्थानीय भागीदारी सेवा प्रबंधन को समुदाय से जोड़ती है। निगरानी में महिलाओं की भागीदारी और मैदानी जल परीक्षण किट का प्रदर्शन गुणवत्ता जाँच के प्रति व्यावहारिक समझ बढ़ा सकते हैं। क्षेत्रीय भाषाओं के प्रमाणपत्र हस्तांतरण अभिलेख अधिक सुलभ बना सकते हैं। ये भागीदारी के सहायक तरीके हैं; विज्ञप्ति सेवा की विश्वसनीयता पर उनका अंतिम प्रभाव स्थापित नहीं करती।[1]
  • 15.96 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों, अर्थात 82% से अधिक की बताई गई कवरेज नल तक पहुँच मापती है। सेवा उद्देश्य मूल्यांकन की ठोस कसौटियाँ देता है: प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 55 लीटर, BIS:10500 के अनुरूप गुणवत्ता तथा नियमित और दीर्घकालिक आपूर्ति। समुदाय प्रबंधन को रखरखाव और गुणवत्ता निगरानी इन आयामों से जोड़नी होगी, ताकि ढाँचा जल जीवन मिशन में अपेक्षित मात्रा और गुणवत्ता की आपूर्ति करने योग्य बना रहे।[1][2]

चुनौतियाँ और संतुलित विश्लेषण

  • टिकाऊ संचालन के लिए जिम्मेदारी के हस्तांतरण के साथ धन भी आवश्यक है। पूर्व विज्ञप्ति के अनुसार सुझाई गई संचालन और रखरखाव नीतियों में उपयोगकर्ता शुल्क तथा पर्याप्त वित्तपोषण शामिल हैं। इससे नियमित संसाधन जरूरत सेवा व्यवस्था का हिस्सा बनती है, लेकिन हर गाँव में एक विशेष शुल्क या समान वसूली व्यवस्था स्थापित नहीं होती।[2]
  • विभिन्न स्तरों की जिम्मेदारियाँ भी स्पष्ट रहनी चाहिए। राज्य योजना, कार्यान्वयन और संचालन तथा रखरखाव की जिम्मेदारियाँ रखते हैं; स्थानीय निकाय समुदाय प्रबंधन के लिए योजनाएँ प्राप्त करते हैं। संभावित चुनौती स्थानीय निगरानी और रखरखाव को व्यापक राज्य व्यवस्था से जोड़ना है। सूचना इस संस्थागत संबंध का समर्थन करती है, राज्य की जिम्मेदारी समाप्त होने का नहीं।[1][2]

आगे की राह

  • स्थानीय समीक्षा में सफल परीक्षण, दर्ज हस्तांतरण, परिसंपत्तियों के स्थान, रखरखाव व्यवस्था और गुणवत्ता निगरानी निष्कर्ष अलग रखने चाहिए। ये सुझाई गई श्रेणियाँ प्रत्येक प्रशासनिक परिणाम को सेवा परिणाम मानने से बचाएँगी। वे वर्णित कार्यों से निकलती हैं और अतिरिक्त आधिकारिक प्रमाणन नियम नहीं बनातीं।[1][2]
  • राज्यों और स्थानीय निकायों को वित्तपोषण व्यवस्था सौंपे गए रखरखाव कार्यों से जोड़नी चाहिए। महिलाओं सहित समुदाय की निगरानी को बताए गए मैदानी जल परीक्षण किट तरीके से समर्थन दिया जा सकता है। मूल्यांकन समय के साथ चलती सेवाएँ देखे, केवल प्रमाणपत्र या स्थानांकित परिसंपत्तियों से विश्वसनीय आपूर्ति का निष्कर्ष न निकाले।[1][2]

निष्कर्ष

जल अर्पण का सत्यापित योगदान निर्धारित परीक्षणों के बाद पूरी योजनाओं को समुदाय-प्रबंधित संचालन की ओर ले जाना है। डिजिटल अभिलेख और भागीदारी इसमें सहायक हैं; वित्तपोषण और गुणवत्ता निगरानी अलग व्यावहारिक कार्य रहते हैं। नल कवरेज पहुँच का महत्त्वपूर्ण प्रमाण है, लेकिन लगातार सुरक्षित सेवा का अलग मूल्यांकन आवश्यक है।[1][2]

प्रारंभिक परीक्षा हेतु तथ्य

  • लगभग 700 स्रोत, 2,691 स्थानांकित परिसंपत्तियों में शामिल हैं।[1]
  • हस्तांतरण अभिलेख, स्थानांकन और जल गुणवत्ता निगरानी के कार्य अलग हैं।[1]
  • समुदाय प्रबंधन राज्यों की बताई गई जिम्मेदारियों के साथ चलता है।[2]

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: जल अर्पण विकेंद्रीकृत जल सेवा प्रबंधन को राज्य की जारी जिम्मेदारी से कैसे जोड़ता है? डिजिटल हस्तांतरण अभिलेख सेवा गुणवत्ता के मूल्यांकन का विकल्प क्यों नहीं हैं? (10 अंक; सुझाई गई उत्तर-लंबाई: 150 शब्द)

आदर्श उत्तर

जल अर्पण पूरी और परीक्षण की गई ग्रामीण जल योजनाएँ संचालन तथा रखरखाव के लिए ग्राम पंचायतों और ग्राम जल समितियों को सौंपता है। पुस्तिका हस्तांतरण से पहले स्थानीय भागीदारी से परीक्षण माँगती है। इससे समुदाय प्रबंधन बनता है, जबकि योजना, कार्यान्वयन और संचालन तथा रखरखाव की राज्य जिम्मेदारियाँ बनी रहती हैं।[1][2]

व्यवस्था टिकाऊ बनाने के लिए रखरखाव और नियमित धन की स्पष्टता चाहिए। पूर्व PIB मार्गदर्शन सुझाई गई नीतियों में उपयोगकर्ता शुल्क और पर्याप्त वित्तपोषण शामिल करता है, समान ग्रामीण शुल्क निर्धारित नहीं करता।[2]

डिजिटल साधनों के सीमित कार्य हैं। जल अर्पण हस्तांतरण दर्ज करता है; सुजलाम भारत परिसंपत्तियों और स्रोतों का स्थानांकन करता है। प्रमाणपत्र तथा स्थान अभिलेख प्रशासनिक या भौतिक विशेषताएँ बताते हैं, लगातार निर्धारित गुणवत्ता वाली आपूर्ति नहीं।[1]

इसलिए गुणवत्ता निगरानी, मैदानी जल परीक्षण किट और महिलाओं की भागीदारी अलग महत्त्वपूर्ण तरीके हैं। मूल्यांकन डिजिटल अभिलेखों के साथ सेवा, रखरखाव और गुणवत्ता देखे, ताकि दर्ज हस्तांतरण को सिद्ध विश्वसनीयता न माना जाए।[1][2]

महत्वपूर्ण शब्द

  • सेवा शुरू करना: निर्धारित परीक्षण के बाद पूरी योजना को उपयोग में लाना।[1]
  • संचालन और रखरखाव: चालू योजना का लगातार प्रबंधन और देखभाल।[1][2]
  • भौगोलिक स्थानांकन: परिसंपत्ति या स्रोत से स्थान की जानकारी जोड़ना।[1]
  • जल गुणवत्ता निगरानी: पानी की गुणवत्ता से संबंधित सामुदायिक निगरानी गतिविधियाँ।[1]

स्रोत एवं तथ्य-जाँच

  1. Jal Arpan observed in more than 1,850 Gram Panchayats across rural India
  2. Extension of Jal Jeevan Mission and Transfer of Rural Water Supply Schemes

UPSC Prelims अभ्यास प्रश्न

इस संपादकीय पर आधारित मौलिक अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

जल अर्पण के सत्यापन और निगरानी संबंधी निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हस्तांतरण से पहले निर्धारित पंद्रह दिन के परीक्षण में ग्राम पंचायत, ग्राम जल समिति या पानी समिति के सदस्य शामिल होते हैं। 2. क्षेत्रीय भाषाओं के हर घर जल प्रमाणपत्र और स्रोत के पानी की जाँच अलग गतिविधियों के रूप में बताए गए हैं। 3. स्थानांकित सूची में 2,691 वितरण परिसंपत्तियों के अतिरिक्त लगभग 700 स्रोत अलग गिने गए हैं। कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. तीनों
  4. कोई नहीं
उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B)

कथन 1 भागीदारी वाले परीक्षण की शर्त से मेल खाता है।[2] कथन 2 क्षेत्रीय भाषा प्रमाणन को अलग बताई गई जल गुणवत्ता निगरानी और स्रोत परीक्षण गतिविधियों से सही अलग करता है।[1] कथन 3 सूची गलत पढ़ता है: लगभग 700 स्रोत 2,691 परिसंपत्तियों में शामिल हैं, अतिरिक्त नहीं। केवल दो कथन सही हैं; B सही है, A कम गिनता है, C गलत कथन 3 शामिल करता है और D सही कथन नकारता है।

प्रश्न 2

कथन-I: समुदाय के नेतृत्व वाले हस्तांतरण को ग्रामीण जल सेवाओं की पूरी राज्य जिम्मेदारी समाप्त करना नहीं मानना चाहिए। कथन-II: PIB समुदाय प्रबंधन के साथ योजना, कार्यान्वयन और संचालन तथा रखरखाव की जिम्मेदारी राज्यों को देता है। कौन-सा विकल्प सही है?

  1. दोनों कथन सही हैं, लेकिन कथन-II, कथन-I की व्याख्या नहीं करता
  2. कथन-I सही है, लेकिन कथन-II गलत है
  3. कथन-I गलत है, लेकिन कथन-II सही है
  4. दोनों कथन सही हैं और कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है
उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (D)

दोनों कथन समर्थित हैं। जारी राज्य जिम्मेदारियाँ बताती हैं कि समुदाय प्रबंधन उनका पूर्ण अंत क्यों नहीं है।[2] D सही है; A सीधे संबंध को नकारता है, B बताई गई जिम्मेदारियाँ गलत कहता है और C उनसे निकलने वाली व्याख्या गलत कहता है।

प्रश्न 3

एक ग्राम समिति हस्तांतरित जल योजना के लिए नियमित वित्तपोषण की तैयारी कर रही है। कौन-सा तरीका PIB द्वारा बताई गई संचालन और रखरखाव नीति संबंधी सलाह से सबसे अधिक मेल खाता है?

  1. संचालन और रखरखाव के लिए पर्याप्त वित्तपोषण रखें, स्थानीय निकायों को उपयोगकर्ता शुल्क लगाने का अधिकार दें और महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को वसूली तथा संचालन और रखरखाव में जोड़ें
  2. केंद्र द्वारा निर्धारित समान ग्रामीण शुल्क अपनाएँ और केंद्र सरकार के पास रखे गाँव-स्तरीय अभिलेखों से वसूली दर सत्यापित करें
  3. राज्य समर्थित संचालन और रखरखाव वित्तपोषण तथा स्वयं सहायता समूहों द्वारा वसूली की व्यवस्था करें, लेकिन उपयोगकर्ता शुल्क लगाने का अधिकार ग्राम पंचायत/ग्राम जल समिति के बजाय राज्य विभाग के पास रखें
  4. ग्राम पंचायत/ग्राम जल समिति को उपयोगकर्ता शुल्क लगाने का अधिकार और पर्याप्त संचालन तथा रखरखाव वित्तपोषण दें, लेकिन महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को संचालन और रखरखाव में जोड़ने के बजाय केवल वसूली तक सीमित रखें
उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A)

A सुझाई गई नीति से मेल खाता है: पर्याप्त संचालन और रखरखाव वित्तपोषण, स्थानीय निकायों को शुल्क लगाने का अधिकार तथा महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों की वसूली और संचालन तथा रखरखाव दोनों में भागीदारी।[2] B समान शुल्क और गाँव-स्तरीय वसूली अभिलेख गलत ढंग से केंद्र को सौंपता है। C वित्तपोषण और समूहों द्वारा वसूली रखता है, लेकिन ग्राम पंचायत/ग्राम जल समिति को शुल्क लगाने का सुझाया अधिकार नहीं देता। D स्थानीय शुल्क और वित्तपोषण रखता है, लेकिन समूहों को वसूली तक सीमित करके उनकी सुझाई रखरखाव भूमिका छोड़ता है। इसलिए A पूरी सलाह से सबसे अधिक मेल खाता है; ये राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को दिए गए नीतिगत सुझाव हैं।[2]