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B.S.H.S SCHOOL · UPSC EDITORIAL ANALYSIS

अध्ययन संग्रह — यह पुरानी घटना पर आधारित विश्लेषण है, आज की खबर नहीं।

गोडावण: बंदी अवस्था में पले पक्षियों को प्राकृतिक आवास के लिए तैयार करना

घटना / स्रोत की तारीख: 03 Oct 2026

GS 3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

3 अक्टूबर को डेजर्ट नेशनल पार्क में बंदी अवस्था में पले गोडावणों को छोड़ने की प्रक्रिया आरंभ हुई। प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाना 4 अक्टूबर के लिए प्रस्तावित था; इस संस्करण की समय-सीमा तक उसके पूरा होने की पुष्टि नहीं थी। यह कदम संरक्षण प्रजनन को आवास की तैयारी और निगरानी से प्राप्त सीख से जोड़ता है।[1]

पहले विषय को समझें

1

संरक्षण की आवश्यकता

PIB गोडावण को गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजाति बताता है। कार्यक्रम बंदी अवस्था में प्रजनन को प्राकृतिक आवास में पुनर्बहाली से जोड़ता है।

किसी केंद्र में पक्षी पैदा करना और प्रकृति में अपने बल पर बनी रहने वाली आबादी स्थापित करना अलग संरक्षण कार्य हैं।[1][2]

2

संरक्षण के अलग स्थान

बहिःस्थल संरक्षण का अर्थ प्राकृतिक आवास से बाहर संरक्षण है, जिसमें प्रजनन केंद्र शामिल हैं। स्वस्थाने संरक्षण (प्राकृतिक आवास में संरक्षण) का अर्थ प्रजाति को उसके प्राकृतिक परिवेश में सुरक्षित रखना है; कार्यक्रम दोनों तरीकों का समर्थन करता है।[2]

3

सत्यापित कालक्रम

CAMPA समर्थित आवास सुधार और संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम 2016 में शुरू हुआ। 3 अक्टूबर 2026 को दो बंदी अवस्था में पले पक्षियों से संबंधित तैयारी शुरू हुई; प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाना 4 अक्टूबर के लिए प्रस्तावित था।[1][2]

4

संस्थागत व्यवस्था

कार्यक्रम में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान शामिल हैं। इंटरनेशनल फंड फॉर हुबारा कंजर्वेशन तकनीकी सहयोग देता है।

राष्ट्रीय प्रतिकरात्मक वनीकरण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (CAMPA) वित्तीय सहायता देता है।[1][2]

5

कार्य और सीमाएँ

कार्ययोजना में प्रजनन, आवास प्रबंधन, खतरों में कमी, आवास पुनर्स्थापन और समुदाय की भागीदारी शामिल हैं। केवल प्रजनन की उपलब्धि से प्राकृतिक आबादी की सफल पुनर्बहाली सिद्ध नहीं होती।[1][2]

6

जंपस्टार्ट और प्राकृतिक जीवन की तैयारी

जंपस्टार्ट में बंदी अवस्था में दिए गए अंडे जंगली घोंसलों में रखे जाते हैं, जहाँ जंगली मादाएँ उन्हें सेती हैं। प्राकृतिक जीवन की तैयारी वाली उड़ानशाला पक्षियों को बिना बाधा उड़ने का स्थान देती है।[1]

7

वर्तमान तैयारी

सम और रामदेवरा केंद्रों में 97 पक्षी थे: 40 जंगली घोंसलों में दिए गए अंडों से और 57 बंदी अवस्था में प्रजनन से प्राप्त हुए थे। इनमें 11 को छोड़ने के लिए चुना गया था; इसका अर्थ सभी का पहले ही छोड़ा जाना नहीं है।[1]

संदर्भ: यह विषय क्यों महत्वपूर्ण है

वर्तमान कदम 2016 में शुरू कार्यक्रम का आगे का चरण है, नया संरक्षण कार्यक्रम नहीं। पहले से शामिल कार्यों में प्रजनन सुविधाएँ, दूरमिति, आवास सुधार और समुदाय की भागीदारी हैं। दूरमिति का अर्थ निगरानी किए जा रहे जीवों के बारे में दूर से जानकारी प्राप्त करना है; इसकी भूमिका प्रजनन परिसर से बाहर पक्षियों की स्थिति समझने में है।[2]

PIB की 3 अक्टूबर की विज्ञप्ति डेजर्ट नेशनल पार्क, जैसलमेर में दो पक्षियों से संबंधित तैयारी बताती है। प्राकृतिक आवास में छोड़े जाने का कार्यक्रम अगले दिन के लिए था। इसलिए इस संस्करण का सत्यापित विकास प्रक्रिया की शुरुआत है; निर्धारित कार्यक्रम के आधार पर बाद की कार्रवाई पूरी मानना उचित नहीं होगा।[1]

परिचय

मुख्य संरक्षण प्रश्न नियंत्रित परिस्थितियों में प्रजनन को प्राकृतिक परिस्थितियों में जीवित रहने से जोड़ने का है। कार्ययोजना संरक्षण प्रजनन, आवास प्रबंधन, खतरे कम करने, पुनर्स्थापन और समुदाय की भागीदारी के माध्यम से इसका उत्तर देती है। ये कार्य एक-दूसरे के पूरक हैं: बंदी अवस्था से निकलने के लिए तैयार पक्षी को भी उपयुक्त आवास और आगे की निगरानी चाहिए।[1][2]

प्रमुख मुद्दे

  • पूर्व कार्यक्रम ने संस्थापक आबादी का एक हिस्सा जुटाया—अर्थात वे पक्षी जिनसे संरक्षण प्रजनन शुरू हुआ—और सम तथा रामदेवरा में सुविधाएँ स्थापित कीं। वर्तमान पक्षियों में 40 जंगली घोंसलों में दिए गए अंडों से प्राप्त और 57 बंदी अवस्था में पैदा हुए हैं। कुल 97 में से 86 बंदी प्रजनन के लिए रखे गए हैं और 11 छोड़ने के लिए चुने गए हैं। प्रजनन आबादी तथा रिहाई के उम्मीदवारों को साथ बनाए रखना निरंतर प्रजनन को प्राकृतिक आवास में आबादी बढ़ाने से जोड़ता है।[1][2]
  • कार्यक्रम के तरीके अलग हैं। जंपस्टार्ट में बंदी अवस्था में दिए गए अंडे जंगली घोंसलों में रखे जाते हैं, जहाँ जंगली मादाएँ उन्हें सेती हैं। PIB के अनुसार इस तरीके से राजस्थान में छह और गुजरात में दो चूजे निकले। उड़ानशाला में तैयारी उड़ान की मांसपेशियाँ विकसित करने, प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुकूलन और स्वाभाविक व्यवहार से संबंधित है। ये तरीके प्रजनन क्षमता को प्राकृतिक जीवन के अलग चरणों से जोड़ते हैं।[1]

महत्व

  • PIB विवरण में वितरण-क्षेत्र सर्वेक्षण, दूरमिति, आबादी-व्यवहार और आवास निगरानी तथा आणविक शोध हैं। ये केंद्र-बाह्य मौजूदगी और आवास-उपयोग समझाते हैं; जानकारी और संरक्षण-पक्षधर प्रयास आवास सुधार निर्देशित करके अवलोकन को मैदानी प्रबंधन से जोड़ते हैं।[2]
  • राजस्थान के आवास कार्यों में डेजर्ट नेशनल पार्क के भीतर लगभग 200 वर्ग किलोमीटर के बाड़बंद घासभूमि परिसर शामिल हैं। PIB भारतीय वन्यजीव संस्थान के दीर्घकालिक दूरमिति अध्ययनों के आधार पर इन्हें प्रमुख प्रजनन आवास बताता है। कार्ययोजना में परभक्षियों से सुरक्षा के उपाय और समुदाय की भागीदारी भी हैं। ये घटक पक्षियों तथा अंडों की उपलब्धता के साथ उस प्राकृतिक क्षेत्र पर काम करते हैं जहाँ उनका उपयोग होगा। मंत्री द्वारा बताए व्यापक पारिस्थितिक और आर्थिक लाभ उनके आकलन ही हैं।[1][2]

चुनौतियाँ और संतुलित विश्लेषण

  • छोड़ने की प्रक्रिया को नियंत्रित परिवेश से प्राकृतिक परिस्थितियों में बदलाव संभालना होगा। PIB बिना बाधा उड़ान के स्थान, सीमित मानवीय उपस्थिति और प्रायोगिक रूप से छोड़े गए पक्षियों से सीख का उल्लेख करता है। इनका उद्देश्य बंदी परिस्थितियों पर निर्भरता घटाना और आगामी निर्णय बेहतर बनाना है; विज्ञप्ति किसी पक्षी की जीवित रहने की दर का अनुमान लगाने का आधार नहीं देती।[1]
  • आवास पुनर्स्थापन, खतरे कम करना और समुदाय की भागीदारी के लिए प्रजनन केंद्र से आगे समन्वित मैदानी कार्य चाहिए। PIB यह भी बताता है कि संरक्षण कार्य सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से निर्देशित हैं, जो इस उद्देश्य से गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर आधारित है। यह तत्कालीन संस्थागत संदर्भ देता है, लेकिन विज्ञप्ति निर्णय के क्रियात्मक निर्देश प्रस्तुत नहीं करती; इस सीमित विवरण से कोई विशेष कानूनी दायित्व नहीं निकालना चाहिए।[1][2]

आगे की राह

  • प्रबंधकों को प्रायोगिक रिहाई और दूरमिति से प्राप्त अवलोकनों के आधार पर तैयारी तथा बाद की निगरानी सुधारनी चाहिए। यह सुझाव कार्यक्रम के मौजूदा सीख और निगरानी घटकों से निकलता है। रिपोर्ट में केंद्रों में रखे, चुने गए, वास्तव में छोड़े गए और प्राकृतिक आबादी में स्थापित पक्षियों को अलग दिखाना चाहिए, क्योंकि प्रत्येक चरण अलग संरक्षण प्रश्न का उत्तर देता है।[1][2]
  • आवास प्रबंधन और समुदाय की भागीदारी को छोड़ने की तैयारी के साथ आगे बढ़ाना चाहिए। समीक्षा में देखा जा सकता है कि प्राप्तकर्ता क्षेत्र, खतरे घटाने के उपाय और बाद की जिम्मेदारियाँ तैयार हैं या नहीं। ये मूल्यांकन के सुझाए गए बिंदु हैं, नई घोषित आधिकारिक शर्तें नहीं।[1][2]

निष्कर्ष

सत्यापित प्रगति प्रजनन और आवास की तैयारी के सहारे पक्षियों को छोड़ने की दिशा में बढ़ना है। इसका महत्त्व बहिःस्थल तथा स्वस्थाने संरक्षण (प्राकृतिक आवास में संरक्षण) को जोड़ने में है; अपने बल पर बनी रहने वाली प्राकृतिक आबादी अलग परिणाम है, जिसके लिए समय के साथ प्रमाण चाहिए। समय-सीमा तक प्रस्तावित रिहाई को प्रस्तावित ही कहा जाना चाहिए।[1][2]

प्रारंभिक परीक्षा हेतु तथ्य

  • बहिःस्थल और स्वस्थाने संरक्षण (प्राकृतिक आवास में संरक्षण) पूरक व्यवस्थाएँ हैं, पुनर्बहाली की क्रमिक सफलता के प्रमाणपत्र नहीं।[2]
  • जंपस्टार्ट का संबंध बंदी अवस्था के अंडों और जंगली मादाओं से सेने से है; उड़ानशाला पक्षियों की तैयारी से संबंधित है।[1]
  • केंद्रों की आबादी, छोड़ने का चयन और स्थापित प्राकृतिक आबादी अलग चरण मापते हैं।[1][2]

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: गोडावण की पुनर्बहाली में संरक्षण प्रजनन और आवास प्रबंधन एक-दूसरे के पूरक कैसे हैं? पक्षियों को छोड़ने की सफलता के मूल्यांकन हेतु सावधानियाँ बताइए। (10 अंक; सुझाई गई उत्तर-लंबाई: 150 शब्द)

आदर्श उत्तर

संरक्षण प्रजनन पुनर्बहाली के लिए पक्षी या अंडे उपलब्ध कराता है, जबकि आवास प्रबंधन उनके प्राकृतिक परिवेश की स्थितियों पर काम करता है। गोडावण कार्यक्रम इन्हें खतरे कम करने, पुनर्स्थापन और समुदाय की भागीदारी से जोड़ता है।[1][2]

इसके तरीके अलग हैं। जंपस्टार्ट में बंदी अवस्था के अंडे जंगली घोंसलों में रखकर जंगली मादाओं से सेए जाते हैं। उड़ानशाला प्राकृतिक परिस्थितियों के लिए उड़ान और तैयारी का अवसर देती है। सीमित मानवीय उपस्थिति और प्रायोगिक रिहाई से सीख प्रक्रिया सुधारते हैं।[1]

मूल्यांकन में केंद्रों में रखे पक्षियों की संख्या, चुने गए पक्षी, वास्तविक रिहाई और स्थापना के प्रमाण अलग रखने चाहिए। दूरमिति और मैदानी अवलोकन आगे की निगरानी में सहायक हैं; आवास प्रबंधक और समुदाय बाहरी परिस्थितियों को संभालते हैं। ये मूल्यांकन की प्राथमिकताएँ हैं, सफलता के प्रमाण नहीं।[1][2]

2016 का कार्यक्रम समेकित दृष्टिकोण देता है, लेकिन प्रजनन उपलब्धि प्राकृतिक आबादी का विकल्प नहीं। 3 अक्टूबर को तैयारी सत्यापित थी; समय-सीमा तक रिहाई प्रस्तावित थी।[1][2]

महत्वपूर्ण शब्द

  • बहिःस्थल संरक्षण: प्रजाति के प्राकृतिक आवास से बाहर संरक्षण।[2]
  • स्वस्थाने संरक्षण: प्रजाति का उसके प्राकृतिक आवास में संरक्षण।[2]
  • दूरमिति: निगरानी किए जा रहे जीवों के बारे में दूर से जानकारी प्राप्त करना।[2]
  • प्राकृतिक जीवन की तैयारी वाली उड़ानशाला: बंदी अवस्था के पक्षियों को प्राकृतिक परिस्थितियों के लिए तैयार करने का उड़ान परिसर।[1]

स्रोत एवं तथ्य-जाँच

  1. Initiation of the process for release of captive-bred Great Indian Bustards
  2. Conservation status of Great Indian Bustard

UPSC Prelims अभ्यास प्रश्न

इस संपादकीय पर आधारित मौलिक अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

गोडावण की पुनर्बहाली के वर्णित तरीकों पर विचार कीजिए: 1. जंपस्टार्ट में बंदी अवस्था में दिए गए अंडे जंगली मादाएँ सेती हैं। 2. प्राकृतिक जीवन की तैयारी वाली उड़ानशाला बिना बाधा उड़ान के स्थान से पक्षियों को तैयार करती है। 3. जंपस्टार्ट में स्थानांतरित अंडों को पहले प्रजनन केंद्र में सेना आवश्यक है, जिसके बाद चूजे जंगली घोंसलों में रखे जाते हैं। कौन-से कथन सही हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3
उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A)

कथन 1 और 2 जंगली मादाओं द्वारा अंडे सेने तथा उड़ानशाला की तैयारी को सही बताते हैं।[1] कथन 3 जंपस्टार्ट का तरीका उलटता है: बंदी अवस्था में दिए गए अंडे जंगली घोंसलों में रखे जाते हैं और उन्हें से रही जंगली मादाएँ स्वीकार करती हैं। केंद्र में पहले चूजे निकालकर घोंसलों में नहीं रखे जाते। A सही है; B, C और D में गलत कथन 3 है।

प्रश्न 2

निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय CAMPA — कार्यक्रम का वित्तपोषण 2. इंटरनेशनल फंड फॉर हुबारा कंजर्वेशन — तकनीकी सहयोग 3. भारतीय वन्यजीव संस्थान — RSRDC के माध्यम से प्राकृतिक जीवन की तैयारी वाली उड़ानशाला का निर्माण कितने युग्म इस पुनर्बहाली कार्यक्रम में भागीदार की बताई गई भूमिका से सही मेल खाते हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. तीनों
  4. कोई नहीं
उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (B)

युग्म 1 और 2 राष्ट्रीय CAMPA का वित्तपोषण तथा इंटरनेशनल फंड फॉर हुबारा कंजर्वेशन का तकनीकी सहयोग सही बताते हैं। युग्म 3 गलत है: राजस्थान वन विभाग ने मंत्रालय और भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों से परामर्श करके RSRDC के माध्यम से उड़ानशाला बनवाई। संस्थान की वैज्ञानिक भागीदारी उसे निर्माण की जिम्मेदार एजेंसी नहीं बनाती। केवल दो युग्म सही हैं, इसलिए B सही है; A, C और D गलत संख्याएँ देते हैं।[1]

प्रश्न 3

कथन-I: इस पुनर्बहाली कार्यक्रम के मूल्यांकन में प्रजनन केंद्रों के परिणामों के साथ प्राप्तकर्ता आवास भी देखना चाहिए। कथन-II: इसकी कार्ययोजना संरक्षण प्रजनन को आवास प्रबंधन, खतरे कम करने और पुनर्स्थापन से जोड़ती है। कौन-सा विकल्प सही है?

  1. दोनों कथन सही हैं और कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है
  2. दोनों कथन सही हैं, लेकिन कथन-II, कथन-I की व्याख्या नहीं करता
  3. कथन-I सही है, लेकिन कथन-II गलत है
  4. कथन-I गलत है, लेकिन कथन-II सही है
उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (A)

दोनों कथन सही हैं। समेकित कार्ययोजना बताती है कि मूल्यांकन में प्रजनन के परिणामों के साथ आवास की परिस्थितियाँ क्यों शामिल होनी चाहिए।[1][2] इसलिए कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है। B इस संबंध को नकारता है; C और D समर्थित कथनों में से एक को गलत बताते हैं।

प्रश्न 4

प्रबंधक उड़ानशाला की तैयारी जारी रखते हुए प्रजनन के लिए पक्षियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले घासभूमि क्षेत्रों का चयन करना चाहते हैं। कार्यक्रम की कौन-सी गतिविधि इस आवास निर्णय के लिए सबसे प्रत्यक्ष जानकारी देती है?

  1. सम और रामदेवरा में वार्षिक चूजा उत्पादन की तुलना
  2. उड़ानशाला के भीतर उड़ान की मांसपेशियों के विकास का अवलोकन
  3. प्राकृतिक क्षेत्र में पक्षियों की दीर्घकालिक दूरमिति और आवास निगरानी का उपयोग
  4. राजस्थान और गुजरात में जंपस्टार्ट से अंडे फूटने की तुलना
उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (C)

C प्राकृतिक क्षेत्र में पक्षियों के अवलोकन को आवास चयन से सीधे जोड़ता है: PIB भारतीय वन्यजीव संस्थान के दीर्घकालिक दूरमिति अध्ययनों से प्रमुख प्रजनन आवासों की पहचान बताता है; पूर्व कार्यक्रम में आवास निगरानी भी है।[1][2] A केंद्रों का प्रजनन मापता है; B उड़ानशाला के भीतर तैयारी से संबंधित है; D अंडे स्थानांतरित करने के तरीके से संबंधित है। ये उपयोगी गतिविधियाँ हैं, लेकिन सीधे यह नहीं बतातीं कि पक्षी प्रजनन के लिए किन घासभूमियों का उपयोग करते हैं।